- यवतमाल में 6 महीने में 152 किसान टंगे फंदे पर, 23 लाख हेक्टेयर बिना बीमा के करपा, 75% मजदूर को 50 दिन काम भी नसीब नहीं – CM लातूर में, DCM विदर्भ में, बावनकुले की नई कमेटी का झुनझुना – तिवारी बोले, हेलीकॉप्टर उतारो, सीधा खाते में पैसा डालो, नहीं तो गांव-गांव से विद्रोह उठेगा
नागपुर, 23 सितंबर :
महाराष्ट्र में इस वक्त दो महाराष्ट्र हैं। एक मेट्रो वाला महाराष्ट्र, जहां हजारों करोड़ का कर्ज लेकर कांच की इमारतें, समृद्धि महामार्ग और टनल बन रहे हैं। दूसरा करपा हुआ महाराष्ट्र, जहां खेत में सोयाबीन-कपास की लाश पड़ी है, शेतमजूर की थाली खाली है और किसान फांसी के फंदे पर झूल रहा है।
और इस करपे महाराष्ट्र पर सरकार दुष्काल पर्यटन कर रही है।
कल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लातूर-धाराशिव-सोलापुर के खेत में सफेद कुर्ते में उतरे, कैमरा क्लिक, फिर हेलीकॉप्टर में गायब। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पश्चिम विदर्भ में चार अफसरों की फौज लेकर घूमे। मंत्रालय में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में एक और मंत्रिमंडल उपसमिति का कागज बना, पंचनामे का आदेश निकला और शनिवार तक अधिसूचना का लॉलीपॉप।
इस नौटंकी की चादर को किसान नेता किशोर तिवारी ने बीच चौराहे पर फाड़ दिया है।
तिवारी ने गरजते हुए कहा है –
“मेट्रो के लिए कर्ज है, महामार्ग के लिए 38,699 करोड़ हैं, 11.03 लाख करोड़ का कर्ज लेकर शहर चमकाने की औकात है, तो किसान को जिंदा रखने के लिए 1 लाख करोड़ क्यों नहीं ? मेट्रो दो साल लेट होगी तो चलेगी, पर फंदे पर झूला किसान अगले बजट तक वापस नहीं आएगा। शर्म करो!”
यवतमाल चीख रहा है – सुनो!
आंकड़ा नहीं, खून है। सरकारी रिकॉर्ड खुद कह रहा है – यवतमाल में जनवरी से जून 2026 तक 152 किसान आत्महत्या। पुसद, रालेगांव, मारेगांव, दारव्हा, महागांव – हर गांव में मातम। पाणी नहीं, चारा नहीं, पीने का पानी तक खतरे में।
और सरकार बोलती है पंचनामा होगा! तिवारी ने पूछा – “करपे खेत में फोटो खिंचवाने से बच्चे की भूख मिटेगी क्या? कर्ज आज थका है, फसल आज जली है, मजदूर आज भूखा है। तुम्हारी फाइल जब तक मुंबई से गांव पहुंचेगी, तब तक कितनी लाशें और गिरेंगी?”
अदृश्य लाश – शेतमजूर –
कोई उसके बारे में नहीं बोलता। जमीन वाले के साथ वो भी मरा है। फसल नहीं तो निराई नहीं, कटाई नहीं, दिहाड़ी नहीं। भूमिहीन, आदिवासी, बटाईदार, महिला मजदूर सब सड़क पर।
CAG ने नंगा कर दिया। रोजगार हमी में 14 हजार करोड़ खा गए, आधे काम अधूरे। 75% परिवारों को 50 दिन भी काम नहीं, सिर्फ 8.7% को 100 दिन। बजट में 4,759 करोड़ दिखाते हो, जमीन पर मजदूर ट्रेन भरकर परप्रांत भाग रहा है। यह योजना है या पलायन योजना?
पीकविमा – महालूट –
मराठवाड़ा में 45.34 लाख हेक्टेयर में पेरा, बीमा सिर्फ 22.38 लाख पर। बाकी 23 लाख हेक्टेयर रामभरोसे। केंद्र खुद लिख रहा है – राज्य ने प्रीमियम ही नहीं भरा, बैंक ने फ्रॉड किया। मतलब किसान पहले प्रकृति से मरा, फिर बाजार ने मारा, अब बीमा कंपनी जूते मार रही है।
तिवारी का 10 हंटर – अब नहीं तो कभी नहीं –
बहुत हो गया भाषण। अब हक चाहिए। तिवारी ने सरकार को 10 कोड़े मारे हैं –
1. 1 लाख करोड़ का जीवनरक्षा निधि – केंद्र-राज्य मिलकर बनाओ। शहर के लिए कर्ज है तो गांव के लिए क्यों नहीं?
2. हेक्टरी 1 लाख ठोको – नुकसान को 50 हजार, पूरा करपा तो 1 लाख। सीधा DBT, कोई बिचौलिया नहीं, कोई पंचनामा नहीं।
3. वसूली पर ताला – दुष्कालग्रस्त में कर्ज वसूली बंद, सिबिल के नाम पर किसानों को नंगा करना बंद करो।
4. 2 लाख कर्जमाफी अभी – घोषणा हो गई, अब अमल करो, नहीं तो कुर्सी छोड़ो।
5. बीमा का हिसाब दो – हर जिले में कैंप लगाओ, 30 दिन में सारे क्लेम क्लियर करो।
6. मजदूर को भत्ता दो – भूमिहीन को अलग दुष्काल भत्ता, हर गांव में MGNREGA शुरू करो।
7. पानी-चारा दो – हर गांव में टैंकर-चारा डिपो का बोर्ड आज लगना चाहिए।
8. फीस माफ करो – किसान-मजदूर के बच्चों की फीस माफ, नहीं तो पूरी पीढ़ी अनपढ़ मजदूर बन जाएगी।
9. असली किसान को पहचानो – सातबारा पर नाम नहीं है तो क्या? जो बोता है वो किसान है, उसे कर्ज-बीमा-मदद दो।
10. विधवा को भीख नहीं, जिंदगी दो – एक चेक फेंककर फोटो मत खिंचाओ। कर्जमुक्ति, पक्की पेंशन, बच्चों की पढ़ाई, धंधे का पैकेज दो।
पवार ने भी हेक्टरी 50 हजार और मजदूर को 25 हजार मांगा है।
तिवारी ने आखिरी में कहा – “महाराष्ट्र को सत्ता और विपक्ष का दुष्काल पर्यटन नहीं चाहिए। अब करपे पिक गिनना बंद करो, जिंदा आदमी गिनना शुरू करो। सरकार हेलीकॉप्टर में, काफिले में, फाइल में नहीं, किसान के खाते में, मजदूर की हथेली में, गरीब की थाली में दिखनी चाहिए। वरना यह करपा खेत तुम्हारी सत्ता को भी करपा कर देगा।”