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हंगरी में लोकतंत्र की जीत

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  • चुनावी मशीन’ विक्टर की हार

पंकज रोशन (9822200500)

मध्य यूरोप की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अप्रैल 2026 में, सोलह साल तक लगातार सत्ता में रहे विक्टर ओरबान ने हंगरी के संसदीय चुनावों में अपनी हार स्वीकार कर ली। ओरबान का युग समाप्त हुआ, और उनकी ही राजनीतिक रणनीतियों का इस्तेमाल कर एक नए जन-आंदोलन ने उनकी ‘उदार-विरोधी लोकतंत्र’ की व्यवस्था को पलट दिया।

चुनौती देने वाले का उदय

इस जीत के नायक हैं तिस्ज़ा पार्टी के नेता पीटर मग्यार। कभी फिदेस के अंदरूनी व्यक्ति रहे मग्यार ने सरकार की कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज़ उठाई और पूरे देश को जगाया। उनके आंदोलन ने शहरों के उदारवादी तबके और ग्रामीण इलाकों को एक साथ जोड़ दिया। ओरबान के आखिरी कार्यकाल की आर्थिक थकान से त्रस्त जनता ने बदलाव को चुना।

जनता का फैसला

इस बार हंगरी के इतिहास में सबसे अधिक मतदान हुआ। लोगों ने घरों से निकलकर लोकतंत्र में अपना विश्वास दिखाया। तिस्ज़ा पार्टी को भारी बहुमत मिला, जबकि सत्ताधारी फिदेस पार्टी सिमट कर रह गई। यह वही दो-तिहाई बहुमत है जिसका इस्तेमाल ओरबान ने देश की दिशा बदलने के लिए किया था।

यह जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इसे रोकने के लिए सारी कोशिशें की गईं। चुनाव से पहले संसद ने चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से खींचा था। विपक्षी बहुल शहरी इलाकों को ग्रामीण क्षेत्रों में मिलाकर उनका असर कम करने की कोशिश हुई। मगर तिस्ज़ा पार्टी ने उन सीटों पर जीत दर्ज की जिन्हें जानबूझकर उनके खिलाफ बनाया गया था। नक्शा बदलने वाली साजिश को जनता ने पलट दिया।

भ्रष्टाचार की मशीन को तोड़ना

इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा था सत्ता का वह तंत्र जिसे आलोचक “राज्य पर कब्ज़ा” कहते थे। आरोप था कि एक दशक से ज़्यादा समय तक सार्वजनिक संसाधनों को वफादार व्यापारियों के एक खास वर्ग की ओर मोड़ दिया गया।

NER सिस्टम के ज़रिए सरकारी ठेकों और यूरोपीय संघ के फंड का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा लोगों को मिला। सार्वजनिक टेंडर अक्सर अपनों के लिए ही बनाए जाते थे। इस “कानूनी भ्रष्टाचार” ने प्रशासन को एक वित्तीय युद्ध-कोष बनाने दिया और लोकतांत्रिक निगरानी को कमज़ोर किया। अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ा: प्रतिस्पर्धा खत्म हुई, इनोवेशन रुका और विदेशी निवेशक असमान मैदान देखकर कतराने लगे।

मीडिया पर कब्ज़ा

ओरबान का सबसे ताकतवर हथियार था मीडिया पर नियंत्रण। प्रधानमंत्री के करीबी व्यापारियों ने राज्य के ठेकों से मिले पैसे से लगभग हर बड़े निजी मीडिया हाउस को खरीद लिया। सार्वजनिक प्रसारक सरकारी प्रवक्ता बन गए, और स्वतंत्र पत्रकारों को “विदेशी एजेंट” कहकर बदनाम किया गया। मग्यार की जीत इस सूचना नाकेबंदी को तोड़कर, सोशल मीडिया और ज़मीनी जुड़ाव के दम पर हासिल हुई।

आस्था का राजनीतिकरण

फिदेस का मुख्य आधार “ईसाई स्वतंत्रता” का नारा था। धार्मिक पहचान को एक राजनीतिक ढाल बनाया गया। सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों को हंगरी की सांस्कृतिक जड़ों पर हमला बताया गया। राज्य ने खुद को “धर्मनिरपेक्ष ब्रुसेल्स” के खिलाफ आस्था का एकमात्र रक्षक बताकर धर्म को ध्रुवीकरण का हथियार बना दिया। इस रणनीति ने युवा, धर्मनिरपेक्ष मतदाताओं और उदारवादियों को दूर कर दिया, जिन्हें यह उदार-विरोधी नीतियों को सही ठहराने का बहाना लगा।

यूरोप की ओर वापसी

नई सरकार ने तुरंत ब्रुसेल्स की ओर झुकाव का संकेत दिया है। मग्यार यूरोपीय आयोग से रिश्ते सुधारकर रुके हुए यूरोपीय फंड को वापस लाना चाहते हैं। उन्होंने यूरोपीय लोक अभियोजक कार्यालय में शामिल होने और यूरोपीय मीडिया स्वतंत्रता अधिनियम पर आपत्ति वापस लेने का वादा किया है। यह महाद्वीपीय लोकतांत्रिक मूल्यों की ओर वापसी और रूसी प्रभाव के खिलाफ कड़े रुख का संकेत है।

‘उदार-विरोधी’ शिल्पकार की विरासत

विक्टर ओरबान एक ऐसी विरासत छोड़कर जा रहे हैं जिसने हंगरी को बदल दिया और दुनियाभर के दक्षिणपंथी आंदोलनों को प्रभावित किया। देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेता के रूप में, उन्होंने अपने हार-स्वीकार भाषण में नतीजों को “दर्दनाक लेकिन स्पष्ट” बताया और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण का संकेत दिया।

आगे की राह

अब जब तिस्ज़ा पार्टी सत्ता में है, तो सिविल सेवा में सोलह साल से जमी वफादारी को खत्म करना सबसे बड़ी चुनौती है। 2026 का चुनाव एक नया अध्याय है। पूरी दुनिया देख रही है कि क्या मग्यार एक “स्वच्छ, यूरोपीय हंगरी” का अपना वादा पूरा कर पाएंगे।

फिलहाल, बुडापेस्ट में सतर्क आशावाद है। राष्ट्र एक पीढ़ी के सबसे बड़े बदलाव की ओर बढ़ चुका है।

  • पंकज रोशन

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19वें अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन में महामेट्रो को ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक’ का राष्ट्रीय पुरस्कार

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  • केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के हाथों प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने लिया सम्मान, बोले- 2047 तक 80 करोड़ लोग शहरों में रहेंगे, भारत मेट्रो नेटवर्क में जल्द अमेरिका को पछाड़ेगा

भुवनेश्वर/नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित 19वें ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया’ (UMI) सम्मेलन में महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महामेट्रो – नागपुर मेट्रो रेल परियोजना) ने बड़ा सम्मान हासिल किया है। महामेट्रो को अपने अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों के दम पर प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक’ (Best Exhibitor) पुरस्कार से नवाजा गया।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल के कर-कमलों द्वारा महामेट्रो के प्रबंध निदेशक श्री श्रावण हर्डीकर ने यह पुरस्कार स्वीकार किया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अर्बन एक्सेसिबिलिटी एंड लिवेबिलिटी इन द डिजिटल एज’ विषय पर आधारित था।

केंद्रीय मंत्री ने कहा – 2047 तक 80 करोड़ आबादी शहरों में
पुरस्कार वितरण अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, “वर्तमान में देश की कुल आबादी का 37 प्रतिशत हिस्सा शहरों में रहता है। वर्ष 2047 तक यह आंकड़ा 50 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा, जब देश की अनुमानित जनसंख्या लगभग 160 करोड़ होगी। इसका अर्थ है करीब 80 करोड़ लोग शहरों में निवास करेंगे। इतनी विशाल आबादी के लिए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अभी से तैयार करनी होगी।”

उन्होंने आगे कहा, “सार्वजनिक परिवहन विकसित करते समय समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान में देश में लगभग 1,185 किमी लंबा मेट्रो नेटवर्क संचालित है, जबकि अमेरिका में यह 1,385 किमी है। भारत में विस्तार की वर्तमान गति से हम जल्द ही अमेरिका को भी पीछे छोड़ देंगे। भविष्य के लिए मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन अनिवार्य है।”

महामेट्रो स्टॉल पर डिजिटल तकनीक का प्रदर्शन –
सम्मेलन में गणमान्य अतिथियों ने महामेट्रो के स्टॉल का अवलोकन किया। प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने विभिन्न डिजिटल प्रणालियों की जानकारी दी :

  1. डिजिटल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट डैशबोर्ड : परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन।
  2. संचालन एवं रखरखाव का डिजिटल रूपांतरण (O&M) : दैनिक संचालन और रख-रखाव में अत्याधुनिक तकनीक।
  3. डिजिटल आई एवं मास्टरमाइंड : यात्री सुरक्षा के लिए उन्नत निगरानी व सुरक्षा तंत्र।
  4. सीमलेस ‘वन ऐप’ यात्रा : टिकट बुकिंग से लेकर पूरे सफर के लिए एकीकृत डिजिटल अनुभव।
  5. स्मार्ट एवं कनेक्टेड मोबिलिटी : लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की सुगम सुविधा।
  6. सोशल मीडिया एंगेजमेंट : यात्रियों से त्वरित और सीधे संवाद का माध्यम।

इस उपलब्धि से नागपुर मेट्रो परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल और सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी मॉडल के रूप में पहचान मिली है।

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गीतांजली टॉकीज के सामने इलेक्ट्रॉनिक दुकान में भीषण आग, 35.70 लाख का नुकसान

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  • गंजीपेठ फायर स्टेशन को सुबह 8:47 बजे कॉल, 4 मिनट में दमकल मौके पर, 5 फायर स्टेशनों की मदद से 7 घंटे बाद आग पर काबू, फ्रिज-एसी-वाशिंग मशीन और कंप्रेसर खाक

नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :

सीए रोड, लोधीपुरा स्थित गीतांजली टॉकीज के सामने एक दुकान में लगी भीषण आग में लाखों का नुकसान हो गया। घटना की रिपोर्ट गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र को प्राप्त हुई है।

गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र अंतर्गत प्राप्त घटना रिपोर्ट के अनुसार PBX से ऑपरेटर श्री चाटे द्वारा सुबह 08:47 बजे आग की सूचना दी गई। कॉल का स्वरूप ‘बड़ी आग’ बताया गया। सूचना मिलते ही गंजीपेठ केंद्र से MH 31 DS 4927 और MH 31 FC 2826 दो गाड़ियां रवाना हुईं और 08:51 बजे घटनास्थल पर पहुंच गईं, यानी महज 4 मिनट में रिस्पॉन्स।

मौके पर मौजूद अधिकारी/कर्मचारी –
प्रमुख अग्नि विमोचक श्रीमान तिलगुले साहेब, श्री विजबे, चालक आत्माराम जाधव, चालक दिनेश खडसे, चालक कमल के., अग्नि विमोचक फिरोज चौधरी, सफाई कर्मचारी विनायक मेश्राम, प्रशिक्षणार्थी घेंडे, डंबारे सहित सिव्हील, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा और सुगतनगर अग्निशमन केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त रूप से मौजूद रहे।

दुकान और मकान का विवरण –

  1. दुकान : अल कौसर रेफ्रिजरेटर, मालक मोहम्मद अश्पाक मो. 9371490718, मोहम्मद अतिक 9922883272 और अब्दुल लतीफ अंसारी 7020459914
  2. बाजू का घर : रमेश मदनलाल भावठा मो. 9604838954
  3. बाजू का घर : मनोज मन्नूलाल श्रीवास मो. 8329205337
    पता – गीतांजली टॉकीज समोर, लोधीपुरा, सी.ए. रोड, नागपुर। थाना – गणेशपेठ।

नुकसान का विवरण –

  1. अल कौसर रेफ्रिजरेटर में फ्रिज, एसी, वायरिंग, वाशिंग मशीन, कंप्रेसर व अन्य साहित्य जलकर खाक – अंदाजन 35 लाख रुपये का नुकसान।
  2. रमेश भावठा के घर में फर्नीचर, कांच साहित्य, इलेक्ट्रिक फिटिंग, पीओपी – 50,000 रुपये।
  3. मनोज श्रीवास के घर में बेड, चेयर, छत की टाडपत्री, एयर कंडीशन – 20,000 रुपये।

कुल अंदाजन नुकसान 35 लाख 70 हजार रुपये मालिकों के दावे के अनुसार बताया गया है। वहीं करीब 5 लाख रुपये की घरगुती सामग्री, लेथ मशीन, स्क्रैप सामान, वाशिंग मशीन, फ्रिज बचा लिया गया। आग लगने का कारण फिलहाल अज्ञात है।

आग को सिव्हील, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा, सुगतनगर अग्निशमन केंद्रों के सहयोग से संयुक्त रूप से बुझाया गया। गाड़ियां दोपहर 15:50 बजे थाने पर वापस लौटीं। मामले की आगे जांच गणेशपेठ पुलिस कर रही है।

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महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय को भाऊ जांबुवंतराव धोटे का नाम देने का प्रयास करूंगा – गडकरी

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  • विजया धोटे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा ज्ञापन, सीएम देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर कैबिनेट में प्रस्ताव रखने का आश्वासन, नागपुर और यवतमाल में भी एक-एक परियोजना को नाम देने की मांग

नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :

महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नागपुर को विदर्भवीर भाऊ जांबुवंतराव धोटे का नाम देने के लिए प्रयास करने का आश्वासन केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिया है।

आज पूर्व विधायक तथा भाऊ की पत्नी विजया धोटे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने गडकरी से मुलाकात कर इस संबंध में निवेदन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर भाऊ की पुत्री ज्वाला जांबुवंतराव धोटे, अन्याय निवारण मंच के सदस्य अंजय्या अनपर्थी और भाजपा आध्यात्मिक सेल के महामंत्री चंद्रशेखर दुबे उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि विजया धोटे महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री बैरिस्टर रामराव आदिक की पुत्री हैं।

ज्ञापन में क्या कहा –
ज्ञापन में उल्लेख है कि महाराष्ट्र विधानसभा के लिए पांच बार और लोकसभा के लिए दो बार चुने गए भाऊ जांबुवंतराव धोटे ने किसान, मजदूर, छात्र और वंचित वर्गों के सवालों के लिए निरंतर संघर्ष किया।

अकोला में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उन्होंने ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा किया था, जो विदर्भ के शैक्षणिक और कृषि विकास की लड़ाई में महत्वपूर्ण साबित हुआ। पशु चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और नागपुर मुख्यालय वाले महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी भाऊ ने लगातार पैरवी की थी।

उनके कार्य से जुड़े विश्वविद्यालय को उनका नाम दिए जाने से भावी पीढ़ियों को उनकी जनसेवा और विदर्भ के विकास के लिए किए गए संघर्ष की प्रेरणा मिलेगी, ऐसी भूमिका शिष्टमंडल ने रखी।

इसके साथ ही भाऊ के सार्वजनिक जीवन से घनिष्ठ संबंध रखने वाले नागपुर और यवतमाल दोनों स्थानों पर एक-एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी सुविधा अथवा विकास परियोजना को उनका नाम देने की मांग भी की गई।

विजया धोटे ने निवेदन में कहा कि भाऊ के कार्य का सम्मान उनके परिवार के साथ ही उनके विचारों और कार्यों से प्रेम करने वाले विदर्भ के असंख्य नागरिकों की भावनाओं को न्याय देने वाला होगा।

गडकरी का आश्वासन –
शिष्टमंडल की मांग सुनने के बाद गडकरी ने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर मंत्रिमंडल में निर्णय हो, इसके लिए प्रयास करेंगे।

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