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विचार से बना परिसर, केवल इमारतों से नहीं

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  • 1932 में महिला शिक्षा के संकल्प के साथ शुरू हुई वीमेन्स एजुकेशन सोसायटी ने सेमिनरी हिल्स में पाया स्थायी ठिकाना, आज पूर्व-प्राथमिक से पीएचडी तक फैला है शैक्षणिक तंत्र

नागपुर, 2 अगस्त 2026 :

वीमेन्स एजुकेशन सोसायटी की कहानी किसी भव्य परिसर से नहीं, बल्कि एक विचार से शुरू हुई थी। 1932 में जब इसकी स्थापना हुई तब इसके पास भवन नहीं थे, केवल महिलाओं के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने का संकल्प था।

वाई.एम. पाथक ने रामाबाई ताम्बे को पहली प्रधानाचार्या बनाकर कला महाविद्यालय की नींव रखी। प्रारंभ में संस्था भिडे कन्या उच्च विद्यालय, खरे टाउन, धंतोली, सिविल लाइन्स और बयाजीनगर टाउन के उधार लिए हुए भवनों में संचालित होती रही। 1942 में तत्कालीन मध्य प्रांत और बरार तथा बाद में मध्य प्रदेश के राज्यपालों द्वारा दान की गई भूमि पर सेमिनरी हिल्स में इसे स्थायी स्थान मिला।

आज वही एकल संस्था सेमिनरी हिल्स और शंकर नगर परिसरों में फैले विद्यालयों और महाविद्यालयों के तंत्र के रूप में विकसित हो चुकी है। श्रीनिवास पब्लिक स्कूल की निदेशक वर्षा मनोहर ने बताया कि यहां पूर्व-प्राथमिक से स्नातकोत्तर और पीएचडी तक की शिक्षा दी जाती है।

संस्था की सामाजिक भूमिका भी लगातार बढ़ी है। 1974 में केवल चार बच्चों के साथ शुरू हुई गोकुल बालवाड़ी आज लगभग 400 बच्चों को शिक्षा दे रही है। इसके साथ खिलौना और पुस्तकालय, अभिभावक परामर्श, पोषण एवं स्वास्थ्य पहल तथा सामुदायिक कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। बालवाड़ी समन्वयक श्रद्धा ठक्कर ने बताया कि निकटवर्ती झुग्गियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण महिलाओं को ‘बाल सेविका’ के रूप में प्रशिक्षित कर रोजगार के अवसर दिए जाते हैं।

पारंपरिक कला, वाणिज्य और विज्ञान के पाठ्यक्रमों के साथ-साथ संस्था ने वास्तुकला, सौंदर्य प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नए क्षेत्र भी जोड़े हैं। लेडी अमृतबाई दागा महाविद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. पूजा पाठक ने बताया कि श्रीमती मनोरमाबाई मुंडले वास्तुकला महाविद्यालय उन गिने-चुने बालिका महाविद्यालयों में है जहां वास्तुकला परिषद द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। रसोई विज्ञान में चार वर्षीय बी.टेक पाठ्यक्रम भी यहां की विशेषता है, जो सामान्यतः केवल डिप्लोमा स्तर पर मिलता है।

सोसायटी की सचिव और प्रबंधक डॉ. नंदा राठी ने कहा कि प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष एक समसामयिक सामाजिक विषय पर केंद्रित रहता है। इस वर्ष का विषय ‘महिला उद्यमिता: परिसर से निगम तक’ है। इसका उद्देश्य छात्रों को उद्योग जगत से जोड़कर कौशल विकास और व्यावहारिक ज्ञान देना है।

उधारी के कक्षा-कक्षों से शुरू होकर आज स्थायी पहचान बनाने वाली इस संस्था की यात्रा यह दर्शाती है कि किसी परिसर की असली पहचान उसकी इमारतें नहीं, बल्कि वह विचार होता है जिसके आधार पर वह खड़ा होता है।

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हरियाली में बसा नन्हा मेहमान – वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट, छोटे तालाब-बगिया बने आशियाना

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  • शहर के छोटे गार्डन, घास के मैदान और जलकुंड दे रहे दुर्लभ डेमसेल्फ्लाई को जीवन, शिवाजी साइंस कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. शार्यु घोणमोडे की रिसर्च में खुलासा, मानसून बाद दिखता है सेब जैसा हरा-पीला कीट, शहरी जैव-विविधता के लिए शुभ संकेत

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

कंक्रीट के जंगल के बीच नागपुर की छोटी-छोटी हरियाली में एक नन्हा, सेब जैसा हरा-पीला कीट अपना घर बसा रहा है। नाम है – वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट (Ischnura rubilio)। यह छोटी सी डेमसेल्फ्लाई बता रही है कि जंगल बचाने के लिए बड़े जंगल जरूरी नहीं, छोटा सा तालाब, बगिया का जलकुंड और घास का टुकड़ा भी काफी है।

कांग्रेस नगर स्थित शिवाजी साइंस कॉलेज के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. शार्यु व्ही. घोणमोडे के अवलोकन के अनुसार, शहर के छोटे गार्डन, घास के पैच और जल निकाय इस दुर्लभ प्रजाति को आवास दे रहे हैं।

डॉ. घोणमोडे ने बताया, “शहर में वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट की मौजूदगी दिखाती है कि छोटे-छोटे हरे-भरे टुकड़े भी ताजे पानी से जुड़ी जैव-विविधता को शहरीकरण के बीच बचा सकते हैं। गार्डन के तालाब से लेकर घास के मैदान तक, यह कीट याद दिलाता है कि शहरी वन्यजीवों को जिंदा रहने के लिए हमेशा बड़े जंगलों की जरूरत नहीं होती।”

कैसा दिखता है यह कीट ?
डॉ. घोणमोडे ने बताया कि नर कीट का शरीर सेब जैसा हरा, छाती पर काली धारियां और पेट का हिस्सा नीली टिप के साथ पीला होता है। बहुत ध्यान से देखने पर ही दिखता है। मादा आमतौर पर थोड़ी फीकी होती है और उसके शरीर के ऊपर काली पट्टी ज्यादा चौड़ी होती है।

कहां मिलता है ?
तालाब, गार्डन के जलकुंड, नाली के किनारे की हरियाली, मौसमी दलदल और बारिश के पानी से भरे गड्ढे – ये सब इन कीटों के लिए उपयुक्त घर बन सकते हैं। डेमसेल्फ्लाई के लिए पानी सिर्फ लैंडस्केप का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन चक्र के लिए जरूरी है।

डॉ. घोणमोडे के अनुसार, “मानसून के बाद का समय इन कीटों को देखने के लिए सबसे अच्छा है। नम मिट्टी, अस्थायी जलकुंड और ताजी वनस्पति उन्हें अनुकूल परिस्थितियां देती है, जबकि ठंडी सुबहों में उन्हें घास की पत्तियों पर शांत बैठे देखा जा सकता है।”

पर्यावरण के लिए संकेतक :
इनकी मौजूदगी ताजे पानी के आवास की उपलब्धता के बारे में सुराग देती है। डॉ. घोणमोडे ने कहा, “डेमसेल्फ्लाई अपने लार्वा चरण में जलीय पर्यावरण पर निर्भर रहती हैं। इनकी मौजूदगी यह बताती है कि क्षेत्र में उपयुक्त जलीय और अर्ध-जलीय आवास मौजूद है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नन्हे कीट का नागपुर में दिखना शहर की शहरी जैव-विविधता के लिए एक शुभ और उत्साहजनक संकेत है।

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यूथ टॉक में गूंजा ‘सशक्त युवा, शिक्षित भारत’ का मंत्र, एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस डिग्री कॉलेज के विद्यार्थी हुए शामिल

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  • यूथ भारती फाउंडेशन के कार्यक्रम में IIT मद्रास के निदेशक पद्मश्री प्रो. वी. कामकोटि का मार्गदर्शन, विद्यार्थियों ने सीखा ज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका

नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :

एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस डिग्री कॉलेज, नंदनवन, नागपुर के विद्यार्थियों ने 25 अक्टूबर 2026 को यूथ भारती फाउंडेशन द्वारा आयोजित यूथ टॉक कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम का मूल मंत्र रहा – “सशक्त युवा, शिक्षित भारत और विकसित राष्ट्र!”

इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा भारत के भविष्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण विचार सुनने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. वी. कामकोटि, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास एवं पद्मश्री सम्मानित थे। उनके मार्गदर्शन को सुनना विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अनुभव रहा। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को शिक्षा के व्यापक दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की जिम्मेदारी को समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम में ज्ञान, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुशासन और निरंतर सीखने के महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि आज के युवा अपनी शिक्षा, प्रतिभा और रचनात्मक सोच के माध्यम से देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

कक्षा के बाहर आयोजित इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञान को व्यापक बनाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और भविष्य के प्रति जागरूकता विकसित करने में सहायक होते हैं। किसी प्रतिष्ठित शिक्षाविद् के विचारों को सुनने से विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक लक्ष्यों के प्रति अधिक गंभीरता से सोचने की प्रेरणा मिलती है।

एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस डिग्री कॉलेज के विद्यार्थियों की इस कार्यक्रम में सहभागिता ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवा सशक्तीकरण के महत्व को रेखांकित किया। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से परिचित कराते हैं और उन्हें समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित करते हैं।

कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि संस्थान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा उन्हें जागरूक, जिम्मेदार और सक्षम नागरिक बनाने के लिए शैक्षणिक गतिविधियों में उनकी सहभागिता को निरंतर प्रोत्साहित करता है।

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आकालग्रस्त तहसीलों के 2.40 लाख छात्रों को परीक्षा शुल्क माफी, ‘जीरो चलन’ से भरे फॉर्म

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  • उच्च व तंत्र शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील बोले – एक भी रुपया नहीं देना होगा, पहले शुल्क भर चुके छात्रों को होगी वापसी, सभी विश्वविद्यालयों ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

मुंबई, 23 अक्टूबर :

राज्य के दुष्काळग्रस्त तालुकों के विद्यार्थियों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। उच्च व तंत्र शिक्षा विभाग ने परीक्षा शुल्क माफी का निर्णय लिया है और इसके लिए परीक्षा फॉर्म में ‘जीरो चलन’ की सुविधा शुरू की गई है।

मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने बताया कि अब तक 2 लाख 40 हजार 365 विद्यार्थियों ने बिना एक रुपया भरे जीरो चलन के जरिए परीक्षा अर्ज दाखल किए हैं। उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी से पढ़ाई में रुकावट न आए।

उन्होंने बताया कि सभी विश्वविद्यालयों, संचालनालय और परीक्षा विभाग स्तर पर यंत्रणा कार्यरत है और परिपत्रक जारी किए गए हैं। जो विद्यार्थी पहले ही शुल्क भर चुके हैं, उन्हें राशि वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

मंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र विद्यार्थी लाभ से वंचित न रहे और सवलत लेते समय कोई दिक्कत न आए।

शिकायत या जानकारी के लिए संपर्क –

विभाग ने प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए संपर्क अधिकारियों के नंबर जारी किए हैं –

  • मुंबई विद्यापीठ : डॉ. पूजा रौंदले – 9322020589, लीलाधर बनसोड – 9833969977
  • सावित्रीबाई फुले पुणे : डॉ. राजेंद्र तलवारे – 9890642431, डॉ. सविता कुलकर्णी – 7720036774
  • शिवाजी कोल्हापुर : डॉ. अजितसिंग जाधव – 9545595999
  • नागपुर (राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज) : डॉ. अनुप पळसोकर – 8378974240, डॉ. विजय तांगडे – 9545112555
  • गोंडवाना गडचिरोली : डॉ. नवीन मंगुळे – 9511910575, डॉ. प्रिया गेडाम – 9049474119
  • अमरावती, जळगाव, नांदेड, संभाजीनगर, सोलापुर, SNDT, YCMOU नाशिक के लिए भी अलग अधिकारियों के नंबर जारी किए गए हैं।

छात्र अपने विश्वविद्यालय के परीक्षा व मूल्यमापन मंडल या विद्यार्थी विकास विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

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