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स्मिता बोकारे यांच्या ‘भाषणसुधा’ पुस्तकाचे थाटात प्रकाशन

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  • संभाषण कला आत्मविश्वाबरोबरच ग्यानवृद्धीही करते – शैलेश पांडे

नागपूर :

मनातील विचार कमी शब्दात व्यक्त करणे म्हणजे वक्तृत्व आहे. ही कला जीवनात आत्मविश्वासाबरोबरच ग्यानवृद्धीही करते, असं स्पष्ट प्रतिपादन ज्येष्ठ संपादक शैलेश पांडे यांनी केले. डॉ दंदे फाउंडेशनच्यावतीने आयोजित स्मिता रवींद्र बोकारे यांच्या ‘भाषणसुधा’ या पुस्तकाच्या प्रकाशन समारंभात ते अध्यक्ष या नात्याने बोलत होते. कुटुंब न्यायालयातील निवृत्त प्रमुख न्यायाधिश मीरा खडक्कार, फाउंडेशनचे अध्यक्ष डॉ. पिनाक दंदे यांच्या उपस्थितीत श्रीमंत बाबूराव धनवटे सभागृहात पुस्तकाचे प्रकाशन करण्यात आले होते. यावेळी ‘भाषणसुधा’ पुस्तकाच्या इ-बुकचेही प्रकाशन करण्यात आले. यावेळी लेखिका श्रीमती बोकारे आणि प्रकाशक श्रीनिकेत सांबरे व्यासपीठीवर उपस्थित होते.

शैलेश पांडे म्हणाले, की, वक्तृत्व म्हणजे फक्त भाषण नव्हे, तर विषयाचा सखोल अभ्यास करुन तो नेमक्या आणि प्रभावी शब्दात मांडण्याची ही कला आहे. मनातील विचार कमी शब्दात समोपच्याटा मनातील ठाव घेतील, अश्या पद्धतीने व्यक्त करणे म्हणजे वक्तृत्व होय. लेखिका श्रीमती बोकारे यांनी मोठ्या साधनेतून हे पुस्तक लिहिले आहे, असा अभिप्रायही शैलेश पांडे यांनी यावेळी व्यक्त केला.

कार्यक्रमाच्या प्रमुख अतिथी मीरा ताई खडक्कार यांनी ‘भाषणसुधा’ पुस्तकाच्या निर्मितीकरिता लेखिकेने केलेल्या अभ्यासाचे कौतुक केले. वक्तृत्व कला व्यक्तिमत्व विकासाकरिता महत्वाचे असल्याचे त्यांनी अधोरेखित केले. वक्तृत्वाकरिता भाषा, शब्दांचा नेमकेपणा, ओघवती भाषा, वाचन, चिॆतन, मनन आदी गरजेचे आहे, असे त्या म्हणाल्या. शिक्षक दिनाच्या दिवशी हाडाची शिक्षक असलेल्या एका शिक्षेकेच्या पुस्तकाचा प्रकाशन समारंभ व्हावा, ही बाब आनंददायी आहे, असे श्रीमती खडक्कार यांनी स्पष्ट केले.

सुमारे ३ दशकांपासून शालेय विद्यार्थ्यांमध्ये वक्तृत्वकलेचा विकास व्हावा याकरिता सातत्याने प्रयत्न करणा-या स्मिता बोकारे यांनी या पुस्तक निर्मितीची प्रवास सांगितला. व्यक्तिमत्व विकासात वक्तृत्वाचे महत्व विषद करताना त्या म्हणाल्या आपण जे शिकतो, अनुभवतो ते वाणीतून व्यक्त करणे म्हणजे वक्तृत्व होय. ‘भाषणसुधा’ पुस्तक विद्यार्थी दशेत या कलेकरिता मार्गदर्शक ठरेल, असा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला. या लेखनाकरिता बालजगत आणि सांदीपनी शाळेचा मोठा सहभाग असल्याचा त्यांनी गौरवपूर्ण उल्लेख केला. पुस्तकाकरिता प्रकाशक श्रीनिकेत सांबरे यांनी घेतलेला पुढाकार महत्वाचा आहे, असे त्या म्हणाल्या.

कार्यक्रमाचे संचालन वसुधा जोशी यांनी केले, तर प्रकाशक श्रीनिकेत सांबरे यांनी आभार मानले. कार्यक्रमाच्या यशस्वीतेकरिता अपेक्षा रामटेके, विशाखा बागडे, रोहित तेलंग, आशिष वाराणशीवार यांनी प्रयत्न केले. प्रकाशन सोहोळ्याला संघाचे महानगर संघचालक राजेश लोया, संपादक श्रीमंत माने, ज्येष्ठ साहित्यिक मदन कुळकर्णी, आ. संजय भेंडे, श्याम पत्तरकिने, स्मिता केळकर, स्मिता पत्तरकिने, आशुतोष अडोणी, आशुतोष फडणवीस, चंदुजी पेंडके, तुषार जोशी, डॉ. राजेंद्र डोळके मान्यवरांसह साहित्यिक-सांस्कृतिक आणि सामाजिक क्षेत्रातील मंडळी मोठ्या संख्येने उपस्थित होती.

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हरियाली में बसा नन्हा मेहमान – वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट, छोटे तालाब-बगिया बने आशियाना

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  • शहर के छोटे गार्डन, घास के मैदान और जलकुंड दे रहे दुर्लभ डेमसेल्फ्लाई को जीवन, शिवाजी साइंस कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. शार्यु घोणमोडे की रिसर्च में खुलासा, मानसून बाद दिखता है सेब जैसा हरा-पीला कीट, शहरी जैव-विविधता के लिए शुभ संकेत

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

कंक्रीट के जंगल के बीच नागपुर की छोटी-छोटी हरियाली में एक नन्हा, सेब जैसा हरा-पीला कीट अपना घर बसा रहा है। नाम है – वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट (Ischnura rubilio)। यह छोटी सी डेमसेल्फ्लाई बता रही है कि जंगल बचाने के लिए बड़े जंगल जरूरी नहीं, छोटा सा तालाब, बगिया का जलकुंड और घास का टुकड़ा भी काफी है।

कांग्रेस नगर स्थित शिवाजी साइंस कॉलेज के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. शार्यु व्ही. घोणमोडे के अवलोकन के अनुसार, शहर के छोटे गार्डन, घास के पैच और जल निकाय इस दुर्लभ प्रजाति को आवास दे रहे हैं।

डॉ. घोणमोडे ने बताया, “शहर में वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट की मौजूदगी दिखाती है कि छोटे-छोटे हरे-भरे टुकड़े भी ताजे पानी से जुड़ी जैव-विविधता को शहरीकरण के बीच बचा सकते हैं। गार्डन के तालाब से लेकर घास के मैदान तक, यह कीट याद दिलाता है कि शहरी वन्यजीवों को जिंदा रहने के लिए हमेशा बड़े जंगलों की जरूरत नहीं होती।”

कैसा दिखता है यह कीट ?
डॉ. घोणमोडे ने बताया कि नर कीट का शरीर सेब जैसा हरा, छाती पर काली धारियां और पेट का हिस्सा नीली टिप के साथ पीला होता है। बहुत ध्यान से देखने पर ही दिखता है। मादा आमतौर पर थोड़ी फीकी होती है और उसके शरीर के ऊपर काली पट्टी ज्यादा चौड़ी होती है।

कहां मिलता है ?
तालाब, गार्डन के जलकुंड, नाली के किनारे की हरियाली, मौसमी दलदल और बारिश के पानी से भरे गड्ढे – ये सब इन कीटों के लिए उपयुक्त घर बन सकते हैं। डेमसेल्फ्लाई के लिए पानी सिर्फ लैंडस्केप का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन चक्र के लिए जरूरी है।

डॉ. घोणमोडे के अनुसार, “मानसून के बाद का समय इन कीटों को देखने के लिए सबसे अच्छा है। नम मिट्टी, अस्थायी जलकुंड और ताजी वनस्पति उन्हें अनुकूल परिस्थितियां देती है, जबकि ठंडी सुबहों में उन्हें घास की पत्तियों पर शांत बैठे देखा जा सकता है।”

पर्यावरण के लिए संकेतक :
इनकी मौजूदगी ताजे पानी के आवास की उपलब्धता के बारे में सुराग देती है। डॉ. घोणमोडे ने कहा, “डेमसेल्फ्लाई अपने लार्वा चरण में जलीय पर्यावरण पर निर्भर रहती हैं। इनकी मौजूदगी यह बताती है कि क्षेत्र में उपयुक्त जलीय और अर्ध-जलीय आवास मौजूद है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नन्हे कीट का नागपुर में दिखना शहर की शहरी जैव-विविधता के लिए एक शुभ और उत्साहजनक संकेत है।

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यूथ टॉक में गूंजा ‘सशक्त युवा, शिक्षित भारत’ का मंत्र, एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस डिग्री कॉलेज के विद्यार्थी हुए शामिल

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  • यूथ भारती फाउंडेशन के कार्यक्रम में IIT मद्रास के निदेशक पद्मश्री प्रो. वी. कामकोटि का मार्गदर्शन, विद्यार्थियों ने सीखा ज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका

नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :

एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस डिग्री कॉलेज, नंदनवन, नागपुर के विद्यार्थियों ने 25 अक्टूबर 2026 को यूथ भारती फाउंडेशन द्वारा आयोजित यूथ टॉक कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम का मूल मंत्र रहा – “सशक्त युवा, शिक्षित भारत और विकसित राष्ट्र!”

इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा भारत के भविष्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण विचार सुनने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. वी. कामकोटि, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास एवं पद्मश्री सम्मानित थे। उनके मार्गदर्शन को सुनना विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अनुभव रहा। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को शिक्षा के व्यापक दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की जिम्मेदारी को समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम में ज्ञान, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुशासन और निरंतर सीखने के महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि आज के युवा अपनी शिक्षा, प्रतिभा और रचनात्मक सोच के माध्यम से देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

कक्षा के बाहर आयोजित इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञान को व्यापक बनाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और भविष्य के प्रति जागरूकता विकसित करने में सहायक होते हैं। किसी प्रतिष्ठित शिक्षाविद् के विचारों को सुनने से विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक लक्ष्यों के प्रति अधिक गंभीरता से सोचने की प्रेरणा मिलती है।

एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस डिग्री कॉलेज के विद्यार्थियों की इस कार्यक्रम में सहभागिता ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवा सशक्तीकरण के महत्व को रेखांकित किया। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से परिचित कराते हैं और उन्हें समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित करते हैं।

कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि संस्थान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा उन्हें जागरूक, जिम्मेदार और सक्षम नागरिक बनाने के लिए शैक्षणिक गतिविधियों में उनकी सहभागिता को निरंतर प्रोत्साहित करता है।

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आकालग्रस्त तहसीलों के 2.40 लाख छात्रों को परीक्षा शुल्क माफी, ‘जीरो चलन’ से भरे फॉर्म

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  • उच्च व तंत्र शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील बोले – एक भी रुपया नहीं देना होगा, पहले शुल्क भर चुके छात्रों को होगी वापसी, सभी विश्वविद्यालयों ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

मुंबई, 23 अक्टूबर :

राज्य के दुष्काळग्रस्त तालुकों के विद्यार्थियों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। उच्च व तंत्र शिक्षा विभाग ने परीक्षा शुल्क माफी का निर्णय लिया है और इसके लिए परीक्षा फॉर्म में ‘जीरो चलन’ की सुविधा शुरू की गई है।

मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने बताया कि अब तक 2 लाख 40 हजार 365 विद्यार्थियों ने बिना एक रुपया भरे जीरो चलन के जरिए परीक्षा अर्ज दाखल किए हैं। उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी से पढ़ाई में रुकावट न आए।

उन्होंने बताया कि सभी विश्वविद्यालयों, संचालनालय और परीक्षा विभाग स्तर पर यंत्रणा कार्यरत है और परिपत्रक जारी किए गए हैं। जो विद्यार्थी पहले ही शुल्क भर चुके हैं, उन्हें राशि वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

मंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र विद्यार्थी लाभ से वंचित न रहे और सवलत लेते समय कोई दिक्कत न आए।

शिकायत या जानकारी के लिए संपर्क –

विभाग ने प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए संपर्क अधिकारियों के नंबर जारी किए हैं –

  • मुंबई विद्यापीठ : डॉ. पूजा रौंदले – 9322020589, लीलाधर बनसोड – 9833969977
  • सावित्रीबाई फुले पुणे : डॉ. राजेंद्र तलवारे – 9890642431, डॉ. सविता कुलकर्णी – 7720036774
  • शिवाजी कोल्हापुर : डॉ. अजितसिंग जाधव – 9545595999
  • नागपुर (राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज) : डॉ. अनुप पळसोकर – 8378974240, डॉ. विजय तांगडे – 9545112555
  • गोंडवाना गडचिरोली : डॉ. नवीन मंगुळे – 9511910575, डॉ. प्रिया गेडाम – 9049474119
  • अमरावती, जळगाव, नांदेड, संभाजीनगर, सोलापुर, SNDT, YCMOU नाशिक के लिए भी अलग अधिकारियों के नंबर जारी किए गए हैं।

छात्र अपने विश्वविद्यालय के परीक्षा व मूल्यमापन मंडल या विद्यार्थी विकास विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

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