ग्रामीण क्षेत्र की जनता की आजीविका का मुख्य आधार खेती है। खेती तभी लाभदायक बन सकती है जब उसे सिंचाई की सुविधा मिले। प्रत्येक किसान के खेत तक पानी पहुंचाना और पानी की उपयोग दक्षता बढ़ाना जरूरी है, तभी पानी की हर बूंद से अधिकतम उत्पादन लिया जा सकता है। सतत सिंचाई मिलने से किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ नकदी और फलदार फसलें भी लेने लगे हैं। यह संभव हुआ है पेंच सिंचाई परियोजना के निर्माण से। नागपुर और भंडारा जिले के लगभग 1 लाख 4 हजार 476 हेक्टेयर क्षेत्र में पेंच सिंचाई परियोजना के कारण कृषि क्रांति संभव हो पाई है।
परियोजना की जानकारी गोदावरी बेसिन की वैनगंगा उप-बेसिन में पेंच नदी पर तोतलाडोह और पेंच पाटबंधारे परियोजना नवेगांव खैरी पूरी हो चुकी है। इस परियोजना की कुल संग्रहण क्षमता 230 दशलक्ष घनमीटर है और संकल्पित उपयोगी संग्रह 141.74 द.ल.घ.मी. है। यह राज्य की पहली ऐसी परियोजना है जिसने प्रस्तावित सिंचाई क्षमता को पूरी तरह से हासिल किया है। दाएं और बाएं नहरों के माध्यम से नागपुर और भंडारा जिले के 1 लाख 4 हजार 476 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो रहा है।
कृषि पर प्रभाव रामटेक, पारशिवनी, मौदा, कामठी और सावनेर तालुकों के साथ-साथ भंडारा जिले के भंडारा और मोहाड़ी तालुका में धान मुख्य फसल है। पहले पर्याप्त और अनिश्चित बारिश के कारण धान के लिए पानी की कमी रहती थी और सूखे की स्थिति बन जाती थी, जिसका खेती पर बुरा असर पड़ता था। पेंच सिंचाई परियोजना से खरीफ और रबी दोनों मौसम की सभी फसलों को लाभ मिला है। सिंचाई से कृषि उत्पादकता बढ़ी है और किसानों में आर्थिक आत्मनिर्भरता आई है। इन तालुकों के किसानों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है और खेती जीवनदायिनी बन गई है।
पेंच परियोजना के कारण नागपुर और भंडारा जिले में परंपरागत फसलों के साथ गन्ना, धान, लंबा रेशा वाला कपास, रबी फसलें, ग्रीष्मकालीन फसलें और फल बगीचों सहित नकदी फसलों में भी भारी वृद्धि हुई है।
इस परियोजना की दाहिनी मुख्य नहर से 27 हजार 300 हेक्टेयर, बायीं मुख्य नहर से 73 हजार 900 हेक्टेयर और दोहरी फसल के अंतर्गत 3 हजार 276 हेक्टेयर, इस प्रकार कुल 1 लाख 4 हजार 476 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिली है। परियोजना बनाते समय प्रस्तावित सिंचाई क्षमता को पूरा करने वाली यह परियोजना बनी है। परियोजना की अद्यतन लागत 1 हजार 685 करोड़ 88 लाख रुपये है, लेकिन इससे सृजित सिंचाई क्षमता परियोजना की लागत से कहीं अधिक है। पिछले तीन दशकों से किसानों को इस सिंचाई परियोजना का बड़ा लाभ मिल रहा है।
सिंचाई के साथ जलविद्युत उत्पादन पेंच नदी पर तोतलाडोह में मुख्य बांध है जिसका निर्माण 1989 में पूरा हुआ। तोतलाडोह में पेंच जलविद्युत मुख्य बांध की संग्रहण क्षमता 1241 द.ल.घ.मी. है और उपयोगी जलसंग्रह 1016 द.ल.घ.मी. है। यहां विद्युत उत्पादन के बाद 33 किमी दूर नवेगांव खैरी में दूसरी परियोजना बनाई गई है। इसकी संग्रहण क्षमता 230 द.ल.घ.मी. और उपयोगी संग्रह 141.74 द.ल.घ.मी. है। इसके अतिरिक्त रामटेक के पास खिंडसी जलाशय को भी पेंच परियोजना में शामिल किया गया है, जहां 103 द.ल.घ.मी. उपयोगी जल उपलब्ध है।
पेंच परियोजना की दाहिनी मुख्य नहर की लंबाई 48.50 किमी है और इसमें 28.40 घनमीटर प्रति सेकंड पानी ले जाने की क्षमता है। इस नहर से नागपुर जिले के 30 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिला है। इसके अलावा नागपुर शहर को पेयजल और कोराडी ताप विद्युत केंद्र को बिजली उत्पादन के लिए पानी दिया जाता है।
पेंच बायीं मुख्य नहर की लंबाई 32.85 किमी है और क्षमता 90 घनमीटर प्रति सेकंड है। इस नहर से नागपुर जिले के 52 हजार 500 हेक्टेयर और भंडारा जिले के 21 हजार 400 हेक्टेयर, कुल 73 हजार 900 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ हो रहा है।
आर्थिक बदलाव खेती को सिंचाई से जोड़ने पर ही बदलाव की शुरुआत होती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खेती को सतत सिंचाई देने के लिए जलयुक्त शिवार सहित विभिन्न योजनाएं चलाई हैं। राज्य में उपलब्ध जल का सिंचाई के लिए अधिकतम उपयोग हो, इसके लिए विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं।
पेंच नदी पर बनी यह सिंचाई परियोजना प्रस्तावित और वास्तविक सिंचाई क्षमता दोनों को पूरा करने वाली परियोजना है। नागपुर और भंडारा जिले में कृषि क्रांति को गति देने वाली इस परियोजना से आर्थिक विकास को भी बल मिला है और आम जनता के जीवन में बुनियादी बदलाव आया है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के हाथों प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने लिया सम्मान, बोले- 2047 तक 80 करोड़ लोग शहरों में रहेंगे, भारत मेट्रो नेटवर्क में जल्द अमेरिका को पछाड़ेगा
भुवनेश्वर/नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित 19वें ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया’ (UMI) सम्मेलन में महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महामेट्रो – नागपुर मेट्रो रेल परियोजना) ने बड़ा सम्मान हासिल किया है। महामेट्रो को अपने अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों के दम पर प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक’ (Best Exhibitor) पुरस्कार से नवाजा गया।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल के कर-कमलों द्वारा महामेट्रो के प्रबंध निदेशक श्री श्रावण हर्डीकर ने यह पुरस्कार स्वीकार किया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अर्बन एक्सेसिबिलिटी एंड लिवेबिलिटी इन द डिजिटल एज’ विषय पर आधारित था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा – 2047 तक 80 करोड़ आबादी शहरों में पुरस्कार वितरण अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, “वर्तमान में देश की कुल आबादी का 37 प्रतिशत हिस्सा शहरों में रहता है। वर्ष 2047 तक यह आंकड़ा 50 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा, जब देश की अनुमानित जनसंख्या लगभग 160 करोड़ होगी। इसका अर्थ है करीब 80 करोड़ लोग शहरों में निवास करेंगे। इतनी विशाल आबादी के लिए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अभी से तैयार करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “सार्वजनिक परिवहन विकसित करते समय समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान में देश में लगभग 1,185 किमी लंबा मेट्रो नेटवर्क संचालित है, जबकि अमेरिका में यह 1,385 किमी है। भारत में विस्तार की वर्तमान गति से हम जल्द ही अमेरिका को भी पीछे छोड़ देंगे। भविष्य के लिए मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन अनिवार्य है।”
महामेट्रो स्टॉल पर डिजिटल तकनीक का प्रदर्शन – सम्मेलन में गणमान्य अतिथियों ने महामेट्रो के स्टॉल का अवलोकन किया। प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने विभिन्न डिजिटल प्रणालियों की जानकारी दी :
डिजिटल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट डैशबोर्ड : परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन।
संचालन एवं रखरखाव का डिजिटल रूपांतरण (O&M) : दैनिक संचालन और रख-रखाव में अत्याधुनिक तकनीक।
डिजिटल आई एवं मास्टरमाइंड : यात्री सुरक्षा के लिए उन्नत निगरानी व सुरक्षा तंत्र।
सीमलेस ‘वन ऐप’ यात्रा : टिकट बुकिंग से लेकर पूरे सफर के लिए एकीकृत डिजिटल अनुभव।
स्मार्ट एवं कनेक्टेड मोबिलिटी : लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की सुगम सुविधा।
सोशल मीडिया एंगेजमेंट : यात्रियों से त्वरित और सीधे संवाद का माध्यम।
इस उपलब्धि से नागपुर मेट्रो परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल और सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी मॉडल के रूप में पहचान मिली है।
गंजीपेठ फायर स्टेशन को सुबह 8:47 बजे कॉल, 4 मिनट में दमकल मौके पर, 5 फायर स्टेशनों की मदद से 7 घंटे बाद आग पर काबू, फ्रिज-एसी-वाशिंग मशीन और कंप्रेसर खाक
नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
सीए रोड, लोधीपुरा स्थित गीतांजली टॉकीज के सामने एक दुकान में लगी भीषण आग में लाखों का नुकसान हो गया। घटना की रिपोर्ट गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र को प्राप्त हुई है।
गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र अंतर्गत प्राप्त घटना रिपोर्ट के अनुसार PBX से ऑपरेटर श्री चाटे द्वारा सुबह 08:47 बजे आग की सूचना दी गई। कॉल का स्वरूप ‘बड़ी आग’ बताया गया। सूचना मिलते ही गंजीपेठ केंद्र से MH 31 DS 4927 और MH 31 FC 2826 दो गाड़ियां रवाना हुईं और 08:51 बजे घटनास्थल पर पहुंच गईं, यानी महज 4 मिनट में रिस्पॉन्स।
मौके पर मौजूद अधिकारी/कर्मचारी – प्रमुख अग्नि विमोचक श्रीमान तिलगुले साहेब, श्री विजबे, चालक आत्माराम जाधव, चालक दिनेश खडसे, चालक कमल के., अग्नि विमोचक फिरोज चौधरी, सफाई कर्मचारी विनायक मेश्राम, प्रशिक्षणार्थी घेंडे, डंबारे सहित सिव्हील, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा और सुगतनगर अग्निशमन केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त रूप से मौजूद रहे।
दुकान और मकान का विवरण –
दुकान : अल कौसर रेफ्रिजरेटर, मालक मोहम्मद अश्पाक मो. 9371490718, मोहम्मद अतिक 9922883272 और अब्दुल लतीफ अंसारी 7020459914
बाजू का घर : रमेश मदनलाल भावठा मो. 9604838954
बाजू का घर : मनोज मन्नूलाल श्रीवास मो. 8329205337 पता – गीतांजली टॉकीज समोर, लोधीपुरा, सी.ए. रोड, नागपुर। थाना – गणेशपेठ।
नुकसान का विवरण –
अल कौसर रेफ्रिजरेटर में फ्रिज, एसी, वायरिंग, वाशिंग मशीन, कंप्रेसर व अन्य साहित्य जलकर खाक – अंदाजन 35 लाख रुपये का नुकसान।
रमेश भावठा के घर में फर्नीचर, कांच साहित्य, इलेक्ट्रिक फिटिंग, पीओपी – 50,000 रुपये।
मनोज श्रीवास के घर में बेड, चेयर, छत की टाडपत्री, एयर कंडीशन – 20,000 रुपये।
कुल अंदाजन नुकसान 35 लाख 70 हजार रुपये मालिकों के दावे के अनुसार बताया गया है। वहीं करीब 5 लाख रुपये की घरगुती सामग्री, लेथ मशीन, स्क्रैप सामान, वाशिंग मशीन, फ्रिज बचा लिया गया। आग लगने का कारण फिलहाल अज्ञात है।
आग को सिव्हील, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा, सुगतनगर अग्निशमन केंद्रों के सहयोग से संयुक्त रूप से बुझाया गया। गाड़ियां दोपहर 15:50 बजे थाने पर वापस लौटीं। मामले की आगे जांच गणेशपेठ पुलिस कर रही है।
विजया धोटे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा ज्ञापन, सीएम देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर कैबिनेट में प्रस्ताव रखने का आश्वासन, नागपुर और यवतमाल में भी एक-एक परियोजना को नाम देने की मांग
नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नागपुर को विदर्भवीर भाऊ जांबुवंतराव धोटे का नाम देने के लिए प्रयास करने का आश्वासन केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिया है।
आज पूर्व विधायक तथा भाऊ की पत्नी विजया धोटे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने गडकरी से मुलाकात कर इस संबंध में निवेदन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर भाऊ की पुत्री ज्वाला जांबुवंतराव धोटे, अन्याय निवारण मंच के सदस्य अंजय्या अनपर्थी और भाजपा आध्यात्मिक सेल के महामंत्री चंद्रशेखर दुबे उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि विजया धोटे महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री बैरिस्टर रामराव आदिक की पुत्री हैं।
ज्ञापन में क्या कहा – ज्ञापन में उल्लेख है कि महाराष्ट्र विधानसभा के लिए पांच बार और लोकसभा के लिए दो बार चुने गए भाऊ जांबुवंतराव धोटे ने किसान, मजदूर, छात्र और वंचित वर्गों के सवालों के लिए निरंतर संघर्ष किया।
अकोला में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उन्होंने ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा किया था, जो विदर्भ के शैक्षणिक और कृषि विकास की लड़ाई में महत्वपूर्ण साबित हुआ। पशु चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और नागपुर मुख्यालय वाले महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी भाऊ ने लगातार पैरवी की थी।
उनके कार्य से जुड़े विश्वविद्यालय को उनका नाम दिए जाने से भावी पीढ़ियों को उनकी जनसेवा और विदर्भ के विकास के लिए किए गए संघर्ष की प्रेरणा मिलेगी, ऐसी भूमिका शिष्टमंडल ने रखी।
इसके साथ ही भाऊ के सार्वजनिक जीवन से घनिष्ठ संबंध रखने वाले नागपुर और यवतमाल दोनों स्थानों पर एक-एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी सुविधा अथवा विकास परियोजना को उनका नाम देने की मांग भी की गई।
विजया धोटे ने निवेदन में कहा कि भाऊ के कार्य का सम्मान उनके परिवार के साथ ही उनके विचारों और कार्यों से प्रेम करने वाले विदर्भ के असंख्य नागरिकों की भावनाओं को न्याय देने वाला होगा।
गडकरी का आश्वासन – शिष्टमंडल की मांग सुनने के बाद गडकरी ने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर मंत्रिमंडल में निर्णय हो, इसके लिए प्रयास करेंगे।