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डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांच्या नावाचा राजकीय वापर थांबवा; नेहरू-आंबेडकरांची तुलना चुकीची — अॅड. धर्मपाल मेश्राम

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  • शिवाजी पार्कातील अभिजीत दिपके यांच्या वक्तव्याचा निषेध; संविधानिक संस्थांविषयी युवकांची दिशाभूल करू नये

नागपूर;मुंबईतील शिवाजी पार्क येथे झालेल्या सभेत अभिजीत दिपके यांनी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर आणि पंडित जवाहरलाल नेहरू यांच्या संदर्भात केलेल्या वक्तव्यांवर भारतीय जनता पक्षाचे महाराष्ट्र प्रदेशाचे माजी उपाध्यक्ष अॅड. धर्मपाल मेश्राम यांनी तीव्र आक्षेप नोंदवला. यासंदर्भात नागपूर प्रेस क्लब येथे आयोजित पत्रकार परिषदेत मेश्राम यांनी दिपके यांच्या विविध विधानांचे खंडन करत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांच्या कार्याचा आणि आंबेडकरी चळवळीचा राजकीय सोयीसाठी वापर करू नये, असे म्हटले.अभिजीत दिपके यांनी शिवाजी पार्क येथील सभेत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर आणि पंडित जवाहरलाल नेहरू यांनी देशातील नागरिकांना मतदानाचा अधिकार दिला, अशा आशयाचे विधान केल्याचा संदर्भ देत अॅड. मेश्राम म्हणाले की, भारताच्या संविधानाने नागरिकांना सार्वत्रिक प्रौढ मताधिकाराची घटनात्मक व्यवस्था दिली असून त्याचे श्रेय कोणत्याही एका व्यक्तीला देणे योग्य नाही. भारतीय संविधानाच्या कलम 326 नुसार लोकसभा निवडणुका प्रौढ मताधिकाराच्या आधारावर होतात आणि देशाची पहिली सार्वत्रिक निवडणूक 1951-52 मध्ये झाली. “डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर हे भारतीय संविधानाच्या निर्मितीतील प्रमुख शिल्पकार होते. त्यांनी सामाजिक न्याय, समानता, स्वातंत्र्य आणि लोकशाही मूल्यांसाठी आयुष्यभर संघर्ष केला. त्यामुळे त्यांच्या कार्याचा संदर्भ देताना ऐतिहासिक वस्तुस्थिती आणि घटनात्मक प्रक्रिया समजून घेणे आवश्यक आहे,” असे मेश्राम यांनी स्पष्ट केले.डॉ. आंबेडकर आणि तत्कालीन पंतप्रधान पंडित जवाहरलाल नेहरू यांच्यातील संबंधांबाबत बोलताना मेश्राम यांनी हिंदू कोड बिलाचा मुद्दा उपस्थित केला. डॉ. आंबेडकरांनी 1951 मध्ये हिंदू कोड बिलाबाबत झालेल्या विलंब आणि सरकारच्या भूमिकेबद्दल नाराजी व्यक्त केली आणि त्यानंतर कायदेमंत्रीपदाचा राजीनामा दिला. नेहरूंच्या तत्कालीन पत्रव्यवहारातही हिंदू कोड बिल मंजूर करण्याबाबत त्यांची भूमिका आणि विधेयकाला होत असलेल्या विरोधाची नोंद आहे. “डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांच्या योगदानाचे मूल्यमापन करताना कोणत्याही राजकीय व्यक्तिमत्त्वाशी त्यांची तुलना करून इतिहास मांडणे योग्य नाही. बाबासाहेबांचे योगदान स्वतंत्र आणि ऐतिहासिक आहे,” असे मेश्राम यांनी सांगितले.
यावेळी मेश्राम यांनी काँग्रेसच्या सत्ताकाळातील काही घटनांचाही संदर्भ दिला. विशेषतः 1975 मध्ये तत्कालीन पंतप्रधान इंदिरा गांधी यांच्या कार्यकाळात देशात आणीबाणी लागू करण्यात आली होती. संविधानातील आणीबाणीच्या तरतुदींचा संदर्भ अधिकृत संविधानाच्या मजकुरात नोंदलेला आहे. अॅड. मेश्राम यांनी पुढे आरोप केला की, अभिजीत दिपके किंवा त्यांच्या कुटुंबीयांचा आंबेडकरी चळवळीशी संबंधित प्रत्यक्ष सहभाग असल्याचे त्यांनी ऐकलेले किंवा पाहिलेले नाही. “आंबेडकरी चळवळीचा इतिहास, त्यासाठी झालेला संघर्ष आणि त्यामागील सामाजिक वेदना समजून घेतल्याशिवाय त्या चळवळीच्या नावाने युवकांना संबोधित करणे योग्य नाही,” अशी टीका त्यांनी केली. हा दावा मेश्राम यांनी पत्रकार परिषदेत केलेला राजकीय आरोप म्हणून मांडला.दरम्यान, २ ऑक्टोबर २०२६ रोजी मुंबईतील शिवाजी पार्क येथे अभिजीत दिपके यांच्या नेतृत्वाखाली निवडणूक आयोग आणि मुख्य निवडणूक आयुक्त ज्ञानेश कुमार यांच्या राजीनाम्याच्या मागणीसाठी आंदोलन झाले, अशी वृत्ते प्रसिद्ध झाली आहेत. संविधानिक संस्थांचे महत्त्व अधोरेखित करताना मेश्राम म्हणाले की, निवडणूक आयोगासह देशातील सर्व संविधानिक संस्थांबाबत युवकांमध्ये विश्वास, घटनात्मक जाणीव आणि वस्तुनिष्ठ माहिती निर्माण करणे आवश्यक आहे. राजकीय मतभेद असू शकतात; मात्र संविधान आणि त्यातून निर्माण झालेल्या संस्थांविषयी बोलताना जबाबदारीचे भान ठेवले पाहिजे.“आजचा युवक देशाच्या लोकशाही व्यवस्थेकडे आशेने पाहत आहे. त्याला इतिहासाचा अर्धवट किंवा राजकीय सोयीचा संदर्भ देण्याऐवजी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांचे संविधाननिर्मितीतील योगदान, सामाजिक न्यायाची भूमिका आणि घटनात्मक लोकशाहीची मूल्ये समजावून सांगण्याची गरज आहे,” असे अॅड. धर्मपाल मेश्राम यांनी यावेळी सांगितले.यावेळी पत्रकार परिषदेला उपमहापौर लीलाताई हातीबेड,महामंत्री संदीप जाधव,सुभाष पारधी,महेंद्र प्रधान,महेंद्र धनविजय, योगिता तेलंग, निधी तेलगोटे,लक्ष्मी हातीठेले, योगेश पाचपोर,लखन येरावार,दुर्गेश्वरी कोसेकर, अंकित चौधरी,सुनील तुरकेल,नितीन बक्सरीया,सतीश शिरसवान, सुमित सोनडवले,अमोल शामकुळे, अनुज कोसरे, किरण मनपिया,तुषार रारोकर,शीतल रारोकर, विजय ढोके, बालू रारोकर इत्यादी उपस्थित होते.

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बच्चों ने देखा गोबरगैस संयंत्र, विज्ञान को जिया और पर्यावरण का लिया संकल्प

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  • परिसर अभ्यास के तहत कोदामेंढी में शामलाल धांडे के घर क्षेत्रभेंट, शेण से गैस बनने की प्रक्रिया, खाना पकाने में उपयोग और अवशेष से खाद बनने की जानकारी, प्रत्यक्ष अनुभव से बढ़ी वैज्ञानिक सोच

कोदामेंढी, 26 अक्टूबर 2026 :

आनंददायी शनिवार के तहत परिसर अभ्यास विषय के अंतर्गत जिला परिषद शाला तोंडली के विद्यार्थियों ने गांव में शामलाल धांडे के घर लगे गोबरगैस संयंत्र की क्षेत्रभेंट की।

परिसर अभ्यास में गोबरगैस संयंत्र के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई थी, जिसके बाद बच्चों के मन में कई सवाल उठे – गोबरगैस क्या है? यह कैसे बनता है? संयंत्र कैसे बना होता है? इसका उपयोग क्या है? इन्हीं जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए बच्चों को प्रत्यक्ष संयंत्र दिखाया गया।

इस दौरान बच्चों को संयंत्र की कार्यप्रणाली, गोबर से जैव-गैस (बायोगैस) बनने की प्रक्रिया, खाना पकाने में इसके उपयोग और संयंत्र से निकलने वाले अवशेषों का खाद के रूप में इस्तेमाल होने की विस्तृत जानकारी दी गई। शामलाल धांडे ने बच्चों के सभी सवालों के संतोषजनक जवाब दिए।

इस क्षेत्रभेंट के माध्यम से बच्चों को समझाया गया कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन में कैसे उपयोगी है। गोबरगैस जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करते हैं और जैविक पदार्थों का सही उपयोग, कचरा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का महत्व भी बताया गया।

इस अवसर पर मुख्याध्यापिका अनुराधा धुर्डे ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए प्रत्यक्ष निरीक्षण, प्रश्नोत्तर और साक्षात्कार के माध्यम से ज्ञान अर्जित करने का महत्व समझाया। इस उपक्रम से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, निरीक्षण कौशल, सवाल पूछने की प्रवृत्ति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। इस उपक्रम में सह-शिक्षक निलेश जाधव का सहयोग रहा।

किताबी ज्ञान को प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ने वाली यह क्षेत्रभेंट विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, आनंददायी और प्रेरणादायी साबित हुई।

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पेच-कन्हान में अवैध रेत खनन की जांच अब CDR तक पहुंचने की मांग

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  • गरंडा-बखारी में पाइप और वैकल्पिक रास्तों पर उठे सवाल – पारशिवनी-कन्हान पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई की मांग, संगठित रैकेट के सबूत मिले तो मकोका लगाने की आवाज, तहसीलदार ने माने नदी में गड्ढों के बगल से बनाए गए वैकल्पिक रास्ते

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

पेच-कन्हान नदी क्षेत्र में कथित अवैध रेत उत्खनन, भंडारण और परिवहन की शिकायतों के बीच जांच का दायरा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। पारशिवनी के तहसीलदार सुरेश वाघचौरे ने खुद माना है कि नदी पात्र में गड्ढे खोदकर रास्ते रोके जाने के बावजूद उनके बगल से वैकल्पिक रास्ते बनाए जा रहे हैं। ऐसे में अब सवाल सिर्फ रेत निकालने वालों पर नहीं, बल्कि पूरी चेन की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है।

माउली, नायकुंड, पालोरा, कालाफाटा, पिपला, वागोला, मेहदी, इटगांव, गरंडा, डोरली और बखारी क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों को लेकर मांग है कि प्रशासन उत्खनन स्थलों, परिवहन मार्गों, रेत के भंडारों और संबंधित दस्तावेजों की संयुक्त पड़ताल करे।

CDR और मोबाइल लोकेशन की कानूनी जांच की मांग –

मामले में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने के बाद अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल टावर लोकेशन की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की मांग की जा रही है।

हालांकि यह स्पष्ट है कि केवल फोन संपर्क या लोकेशन के आधार पर किसी की संलिप्तता साबित नहीं होती। ऐसी जांच सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और लागू कानूनों के अनुसार ही हो सकती है। जांच में देखा जाना चाहिए कि संबंधित अवधि में शिकायतें कब मिलीं, उन पर क्या कार्रवाई हुई, मौके का निरीक्षण हुआ या नहीं और सरकारी रिकॉर्ड में क्या दर्ज है।

कुछ कर्मचारियों द्वारा एक से अधिक मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने का संदेह भी व्यक्त किया जा रहा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। एक से अधिक नंबर होना अपने आप में अपराध का सबूत नहीं है।

राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो –

स्थानीय स्तर पर इस कथित कारोबार में राजनीतिक संपर्कों या हस्तक्षेप की आशंका भी जताई जा रही है। लेकिन बिना ठोस प्रमाण के किसी व्यक्ति या पदाधिकारी पर आरोप को तथ्य नहीं माना जा सकता। मांग है कि प्रशासन बिना दबाव के शिकायतों, परमिट, परिवहन रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच करे।

गरंडा-बखारी में पाइप और रास्तों का रहस्य –

पेच नदी किनारे नया रास्ता तैयार करने और बखारी शिवार की ओर नदी पात्र में बड़े पाइप डालने की चर्चा को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। क्या इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई है? क्या नदी पात्र में बदलाव किया गया है? क्या इसका कथित अवैध रेत परिवहन से संबंध है? इन सवालों का जवाब संयुक्त स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच से ही मिल सकता है।

पारशिवनी-कन्हान पुलिस के समन्वय की जरूरत –

यह क्षेत्र पारशिवनी और कन्हान पुलिस थानों की सीमा में आता है, इसलिए दोनों थानों, राजस्व विभाग, रामटेक के उपविभागीय अधिकारी, जिलाधिकारी और नागपुर ग्रामीण पुलिस के बीच समन्वय जरूरी बताया जा रहा है। नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मस्के और स्थानीय अपराध शाखा से संयुक्त जांच की मांग उठ रही है।

इस मामले में पारशिवनी के सहायक पुलिस निरीक्षक किशोर शेळके से फोन पर संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिली। अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।

राजस्व मंत्री से DGP तक हस्तक्षेप की मांग –

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री, गृहमंत्री, पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस महानिरीक्षक से मामले का संज्ञान लेने की मांग हो रही है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के समन्वय से विशेष जांच अभियान चलाकर अधिकृत रेत स्रोत, परिवहन अनुमति और बाजार में आपूर्ति की स्थिति की भी पड़ताल करने की जरूरत बताई गई है।

संगठित अपराध मिला तो मकोका पर विचार –

मामले में कठोर कार्रवाई और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाने की मांग भी उठी है। हालांकि मकोका के लिए सिर्फ बड़े पैमाने पर रेत चोरी की शिकायत पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कानून में निर्धारित संगठित अपराध के आवश्यक तत्वों का पूरा होना जरूरी है। यदि निष्पक्ष जांच में ऐसे ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो सक्षम अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं, अन्यथा खनन, राजस्व, पर्यावरण और आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई होगी।

फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन संयुक्त निरीक्षण कब करता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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वडेट्टीवार का बड़ा बयान – कांग्रेस की गुटबाजी से नागपुर शहर में नुकसान, फिर भी ग्रामीण समर्थन से वंजारी की जीत पक्की

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  • स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में 38 उम्मीदवार, 64.82% मतदान के बाद कल मतगणना, वडेट्टीवार ने कहा – शहर के नेताओं ने ‘तुझा की माझा’ खेला, चंद्रपुर-गडचिरोली में वंजारी को अभूतपूर्व समर्थन

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

महाराष्ट्र विधान परिषद के नागपुर विभाग पदवीधर (स्नातक) मतदारसंघ चुनाव की मतगणना से एक दिन पहले कांग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने नागपुर शहर के कई स्थानीय नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के दौरान घोला घातला (धोखा दिया) और ‘तुझा की माझा’ का खेल खेलकर समय बर्बाद किया।

वडेट्टीवार ने हालांकि दावा किया है कि इसके बावजूद महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजित वंजारी की जीत 100% निश्चित है, क्योंकि नागपुर ग्रामीण और शेष विदर्भ में उन्हें स्नातक मतदाताओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला है।

वडेट्टीवार ने क्या कहा ?
चुनाव पर बात करते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य के राजस्व मंत्री ने इस स्नातक चुनाव को अत्यंत प्रतिष्ठा का विषय बना दिया था। सत्ता पक्ष के नेताओं ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक दी थी, तब कांग्रेस के स्थानीय स्तर के कुछ नेताओं की भूमिका संदेहास्पद और सुस्त रही।

उन्होंने कहा, “कुछ नेताओं के नाम लेना उचित नहीं होगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि ये नेता चुनाव के काम में देर से लगे। अभिजित वंजारी हमेशा सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को साथ लेकर चलने वाले जननेता हैं, परंतु नागपुर शहर में वैसी एकजुटता या तालमेल दिखाई नहीं दिया।”

उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक लोगों ने एक-दूसरे की टांग खिंचाई में ही समय गंवा दिया।

ग्रामीण भाग पर भरोसा –
वडेट्टीवार ने कहा कि चंद्रपुर, गडचिरोली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मतदाता बड़ी संख्या में वंजारी के पीछे खड़े रहे हैं। वहां उन्हें प्रचंड प्रतिसाद मिला है।

“नागपुर से 50% मत मिले तो भी, नागपुर के अलावा शेष चार से पांच जिलों से अभिजित वंजारी को स्नातक मतदाताओं का उत्तम और अभूतपूर्व समर्थन मिला है। इसी ग्रामीण समर्थन के मजबूत भरोसे पर महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजित वंजारी 100% चुनावी मैदान में बाजी मारेंगे और विजयी होकर विधान परिषद में जाएंगे, ऐसा ठोस विश्वास है।”

पृष्ठभूमि –
गौरतलब है कि नागपुर विभाग स्नातक मतदारसंघ के लिए 23 अक्टूबर को 6 जिलों – नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गडचिरोली के 445 केंद्रों पर मतदान हुआ था, जिसमें 64.82% मतदान दर्ज हुआ। कुल 38 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतगणना कल 27 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से मानकापुर इनडोर स्टेडियम में 84 टेबल पर होगी।

वडेट्टीवार के इस बयान के बाद नागपुर स्नातक चुनाव का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है और पार्टी के भीतर चर्चा तेज हो गई है।

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