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कागज़ों पर करोड़पति, ज़मीन पर सन्नाटा: नागपुर का रियल एस्टेट – न क्रैश, न बूम… सिर्फ ‘सन्नाटे वाली महंगाई

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नागपुर बदल रहा है। MIHAN, समृद्धि महामार्ग, GMR एयरपोर्ट और मेट्रो के नाम पर शहर की तस्वीर चमक रही है। लेकिन इसी चमक के पीछे एक कड़वा सच छुपा है – कीमतें आसमान में हैं, और घर खाली पड़े हैं।

घर खरीदना अब आम आदमी के लिए सपना बन गया है और निवेशकों के लिए जुआ। सवाल एक ही है – इतनी महंगी प्रॉपर्टी खरीदेगा कौन और इसमें रहेगा कौन?

1. दो नागपुर: एक 75 लाख का प्लॉट, दूसरा 10 करोड़ का फ्लैट
बाहरी नागपुर: MIHAN से आगे जामठा, सोंडापार, समृद्धि इंटरचेंज तक ज़मीन ₹5,000 से ₹5,200 प्रति वर्ग फुट बिक रही है। मतलब 1,500 वर्ग फुट का प्लॉट ₹75 लाख से ऊपर। ये सिर्फ ज़मीन है, घर बनाने और रजिस्ट्री अलग।

भीतरी नागपुर: सिविल लाइंस, रामदासपेठ, शिवाजी नगर, धरमपेठ में मिडिल-क्लास हाउसिंग गायब। उसकी जगह ₹4 करोड़ से ₹10 करोड़ वाले लक्ज़री टावर, पेंटहाउस और स्काई बंगलो आ गए हैं। कोर में ₹12,000/वर्ग फुट तक रेट।

डेवलपर्स का तर्क: सिक्योरिटी, “लॉक-एंड-लीव”, पूल-मेंटेनेंस सब एक फीस में। पर हकीकत ये है कि रामदासपेठ में बंगले के लिए ज़मीन ही नहीं बची, इसलिए वर्टिकल फ्लैट ही ऑप्शन बचा है।

2. बुलबुले की 3 कड़वी हकीकतें
बाजार GMR एयरपोर्ट, MIHAN और मेट्रो के सपने बेच रहा है। पर ज़मीन पर 3 सच्चाई मुंह चिढ़ा रही हैं:

  1. तनख्वाह vs कीमत: MIHAN में IT, एयरोस्पेस, AIIMS हैं, पर इतनी हाई-पेइंग नौकरियां नहीं बनीं जितनी ज़मीन काट दी गई। बिना नए सैलरीड परिवारों के करोड़ों के फ्लैट किसके लिए?
  2. भविष्य आज बेच रहे हैं: एयरपोर्ट का पूरा फायदा 15-20 साल बाद आएगा। आज ही 10 KM दूर प्लॉट को “एरोसिटी” कहकर बेचना जल्दबाज़ी है।
  3. लास्ट-माइल गायब: मेट्रो बीच शहर में ठीक है। पर बाहरी लेआउट में स्टेशन से 3-4 KM दूर हो तो दूध-ब्रेड के लिए भी गाड़ी चाहिए।

“जमीन सोना हो सकती है, लेकिन जब तक कोई रहने न आए, वो सिर्फ मिट्टी का मोल देती है।”

3. खरीदार कौन? 50% से ज्यादा सिर्फ सट्टेबाज़
खरीदारी का गणित डरा देता है:

  • 2/3 खरीदार: लोकल व्यापारी, रिटायर्ड अफसर, विदर्भ के जिलों से आए लोग।
  • 1/3 खरीदार: पुणे-मुंबई के IT वाले, गल्फ के NRI।

लेकिन MIHAN के आगे 50% से ज्यादा प्लॉट सिर्फ 20-30% मुनाफे पर बेचने के लिए लिए जा रहे हैं। 3 साल में घर बनाने वाले असली लोग 15% से भी कम।

नतीजा: “खाली लेआउट सिंड्रोम” – चौड़ी सड़कें, आलीशान गेट, स्ट्रीटलाइट… पर रात में अंधेरा। न दुकान, न क्लिनिक, न स्कूल। बिना लोग बसे इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे पनपेगा?

“जिस शहर में सपने मध्यमवर्ग के हों, वहाँ महल सिर्फ़ ख़रीदार तलाशते रह जाते हैं।”

4. तो क्या नागपुर में 2008 जैसा बड़ा क्रैश आएगा?
सीधा जवाब: नहीं।
मुंबई-दिल्ली की तरह यहां बैंक लोन पर निर्भरता कम है। लोग अपनी पूंजी लगाते हैं। खाली ज़मीन रखने का खर्च भी नहीं है, इसलिए कोई घबराकर 40% डिस्काउंट पर बेचेगा नहीं।

पर इसका मतलब ये नहीं कि खतरा नहीं। नागपुर का “क्रैश” बहुत शांत और धीमा होगा, 3 रूपों में:

  1. लिक्विडिटी फ्रीज: मांगने वाले ₹5,200 मांगेंगे, देने वाले ₹3,000 देंगे। डील ही नहीं होगी।
  2. छुपी छूट: बोर्ड पर रेट वही, पर अंदर फ्री रजिस्ट्री, डेवलपमेंट चार्ज माफ, मॉड्यूलर किचन फ्री, कैशबैक।
  3. समय की मार: 5-6 साल दाम रुके रहेंगे। महंगाई हर साल 25% असल वैल्यू खा जाएगी।

“भाव भले ही बोर्ड पर न गिरें, लेकिन जब ग्राहक ही न मिले, तो संपत्ति सिर्फ कागज़ का टुकड़ा बन जाती है।”

5. बसा-बसाया vs खाली – फर्क साफ है
बेसा, पिपला, नरेंद्र नगर महंगे हैं पर वहां जान है। दुकानें, स्कूल, अस्पताल, तुरंत रहने वाले लोग।
MIHAN के आगे सिर्फ “विज्ञापन वाले प्लॉट” हैं। रात में एक चक्कर लगा लीजिए, कितनी लाइटें जल रही हैं – जवाब मिल जाएगा।

प्रॉपर्टी लेने से पहले ये 3 काम जरूर करें

  1. सेल्स टीम की बात नहीं, खुद जाकर रात 9 बजे लेआउट देखें।
  2. बिल्डर के ब्रोकर नहीं, लोकल इंडिपेंडेंट ब्रोकर से फीडबैक लें।
  3. याद रखें – प्रॉपर्टी की कीमत कंक्रीट से नहीं, लोगों से बनती है।

निचोड़
नागपुर बढ़ रहा है, इसमें शक नहीं। पर अगर विकास सिर्फ ब्रोशर और होर्डिंग तक सीमित रहा और ज़मीन पर आम आदमी नहीं बसा, तो ये सारी ग्रोथ “सन्नाटे वाली महंगाई” बनकर रह जाएगी।

जापान में लाखों “अकिया” घर खाली हैं। अमेरिका-चीन का संकट भी इसी वजह से आया था – जब प्रॉपर्टी घर न रहकर सिर्फ ट्रेडिंग चिप बन जाए।

अंतिम लाइन: “याद रखिए, शहर सिर्फ कंक्रीट के ऊंचे ढांचों और विज्ञापनों से नहीं बनते – शहर वहां बनते हैं जहां आम आदमी की रोटी, नौकरी और जिंदगी बसती है।”

“कागज़ों पर करोड़पति बनाने वाला बाज़ार, अक्सर सड़क पर खाली मकान छोड़ जाता है।”

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बच्चों ने देखा गोबरगैस संयंत्र, विज्ञान को जिया और पर्यावरण का लिया संकल्प

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  • परिसर अभ्यास के तहत कोदामेंढी में शामलाल धांडे के घर क्षेत्रभेंट, शेण से गैस बनने की प्रक्रिया, खाना पकाने में उपयोग और अवशेष से खाद बनने की जानकारी, प्रत्यक्ष अनुभव से बढ़ी वैज्ञानिक सोच

कोदामेंढी, 26 अक्टूबर 2026 :

आनंददायी शनिवार के तहत परिसर अभ्यास विषय के अंतर्गत जिला परिषद शाला तोंडली के विद्यार्थियों ने गांव में शामलाल धांडे के घर लगे गोबरगैस संयंत्र की क्षेत्रभेंट की।

परिसर अभ्यास में गोबरगैस संयंत्र के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई थी, जिसके बाद बच्चों के मन में कई सवाल उठे – गोबरगैस क्या है? यह कैसे बनता है? संयंत्र कैसे बना होता है? इसका उपयोग क्या है? इन्हीं जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए बच्चों को प्रत्यक्ष संयंत्र दिखाया गया।

इस दौरान बच्चों को संयंत्र की कार्यप्रणाली, गोबर से जैव-गैस (बायोगैस) बनने की प्रक्रिया, खाना पकाने में इसके उपयोग और संयंत्र से निकलने वाले अवशेषों का खाद के रूप में इस्तेमाल होने की विस्तृत जानकारी दी गई। शामलाल धांडे ने बच्चों के सभी सवालों के संतोषजनक जवाब दिए।

इस क्षेत्रभेंट के माध्यम से बच्चों को समझाया गया कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन में कैसे उपयोगी है। गोबरगैस जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करते हैं और जैविक पदार्थों का सही उपयोग, कचरा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का महत्व भी बताया गया।

इस अवसर पर मुख्याध्यापिका अनुराधा धुर्डे ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए प्रत्यक्ष निरीक्षण, प्रश्नोत्तर और साक्षात्कार के माध्यम से ज्ञान अर्जित करने का महत्व समझाया। इस उपक्रम से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, निरीक्षण कौशल, सवाल पूछने की प्रवृत्ति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। इस उपक्रम में सह-शिक्षक निलेश जाधव का सहयोग रहा।

किताबी ज्ञान को प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ने वाली यह क्षेत्रभेंट विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, आनंददायी और प्रेरणादायी साबित हुई।

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पेच-कन्हान में अवैध रेत खनन की जांच अब CDR तक पहुंचने की मांग

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  • गरंडा-बखारी में पाइप और वैकल्पिक रास्तों पर उठे सवाल – पारशिवनी-कन्हान पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई की मांग, संगठित रैकेट के सबूत मिले तो मकोका लगाने की आवाज, तहसीलदार ने माने नदी में गड्ढों के बगल से बनाए गए वैकल्पिक रास्ते

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

पेच-कन्हान नदी क्षेत्र में कथित अवैध रेत उत्खनन, भंडारण और परिवहन की शिकायतों के बीच जांच का दायरा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। पारशिवनी के तहसीलदार सुरेश वाघचौरे ने खुद माना है कि नदी पात्र में गड्ढे खोदकर रास्ते रोके जाने के बावजूद उनके बगल से वैकल्पिक रास्ते बनाए जा रहे हैं। ऐसे में अब सवाल सिर्फ रेत निकालने वालों पर नहीं, बल्कि पूरी चेन की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है।

माउली, नायकुंड, पालोरा, कालाफाटा, पिपला, वागोला, मेहदी, इटगांव, गरंडा, डोरली और बखारी क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों को लेकर मांग है कि प्रशासन उत्खनन स्थलों, परिवहन मार्गों, रेत के भंडारों और संबंधित दस्तावेजों की संयुक्त पड़ताल करे।

CDR और मोबाइल लोकेशन की कानूनी जांच की मांग –

मामले में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने के बाद अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल टावर लोकेशन की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की मांग की जा रही है।

हालांकि यह स्पष्ट है कि केवल फोन संपर्क या लोकेशन के आधार पर किसी की संलिप्तता साबित नहीं होती। ऐसी जांच सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और लागू कानूनों के अनुसार ही हो सकती है। जांच में देखा जाना चाहिए कि संबंधित अवधि में शिकायतें कब मिलीं, उन पर क्या कार्रवाई हुई, मौके का निरीक्षण हुआ या नहीं और सरकारी रिकॉर्ड में क्या दर्ज है।

कुछ कर्मचारियों द्वारा एक से अधिक मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने का संदेह भी व्यक्त किया जा रहा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। एक से अधिक नंबर होना अपने आप में अपराध का सबूत नहीं है।

राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो –

स्थानीय स्तर पर इस कथित कारोबार में राजनीतिक संपर्कों या हस्तक्षेप की आशंका भी जताई जा रही है। लेकिन बिना ठोस प्रमाण के किसी व्यक्ति या पदाधिकारी पर आरोप को तथ्य नहीं माना जा सकता। मांग है कि प्रशासन बिना दबाव के शिकायतों, परमिट, परिवहन रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच करे।

गरंडा-बखारी में पाइप और रास्तों का रहस्य –

पेच नदी किनारे नया रास्ता तैयार करने और बखारी शिवार की ओर नदी पात्र में बड़े पाइप डालने की चर्चा को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। क्या इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई है? क्या नदी पात्र में बदलाव किया गया है? क्या इसका कथित अवैध रेत परिवहन से संबंध है? इन सवालों का जवाब संयुक्त स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच से ही मिल सकता है।

पारशिवनी-कन्हान पुलिस के समन्वय की जरूरत –

यह क्षेत्र पारशिवनी और कन्हान पुलिस थानों की सीमा में आता है, इसलिए दोनों थानों, राजस्व विभाग, रामटेक के उपविभागीय अधिकारी, जिलाधिकारी और नागपुर ग्रामीण पुलिस के बीच समन्वय जरूरी बताया जा रहा है। नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मस्के और स्थानीय अपराध शाखा से संयुक्त जांच की मांग उठ रही है।

इस मामले में पारशिवनी के सहायक पुलिस निरीक्षक किशोर शेळके से फोन पर संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिली। अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।

राजस्व मंत्री से DGP तक हस्तक्षेप की मांग –

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री, गृहमंत्री, पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस महानिरीक्षक से मामले का संज्ञान लेने की मांग हो रही है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के समन्वय से विशेष जांच अभियान चलाकर अधिकृत रेत स्रोत, परिवहन अनुमति और बाजार में आपूर्ति की स्थिति की भी पड़ताल करने की जरूरत बताई गई है।

संगठित अपराध मिला तो मकोका पर विचार –

मामले में कठोर कार्रवाई और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाने की मांग भी उठी है। हालांकि मकोका के लिए सिर्फ बड़े पैमाने पर रेत चोरी की शिकायत पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कानून में निर्धारित संगठित अपराध के आवश्यक तत्वों का पूरा होना जरूरी है। यदि निष्पक्ष जांच में ऐसे ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो सक्षम अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं, अन्यथा खनन, राजस्व, पर्यावरण और आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई होगी।

फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन संयुक्त निरीक्षण कब करता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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वडेट्टीवार का बड़ा बयान – कांग्रेस की गुटबाजी से नागपुर शहर में नुकसान, फिर भी ग्रामीण समर्थन से वंजारी की जीत पक्की

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  • स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में 38 उम्मीदवार, 64.82% मतदान के बाद कल मतगणना, वडेट्टीवार ने कहा – शहर के नेताओं ने ‘तुझा की माझा’ खेला, चंद्रपुर-गडचिरोली में वंजारी को अभूतपूर्व समर्थन

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

महाराष्ट्र विधान परिषद के नागपुर विभाग पदवीधर (स्नातक) मतदारसंघ चुनाव की मतगणना से एक दिन पहले कांग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने नागपुर शहर के कई स्थानीय नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के दौरान घोला घातला (धोखा दिया) और ‘तुझा की माझा’ का खेल खेलकर समय बर्बाद किया।

वडेट्टीवार ने हालांकि दावा किया है कि इसके बावजूद महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजित वंजारी की जीत 100% निश्चित है, क्योंकि नागपुर ग्रामीण और शेष विदर्भ में उन्हें स्नातक मतदाताओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला है।

वडेट्टीवार ने क्या कहा ?
चुनाव पर बात करते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य के राजस्व मंत्री ने इस स्नातक चुनाव को अत्यंत प्रतिष्ठा का विषय बना दिया था। सत्ता पक्ष के नेताओं ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक दी थी, तब कांग्रेस के स्थानीय स्तर के कुछ नेताओं की भूमिका संदेहास्पद और सुस्त रही।

उन्होंने कहा, “कुछ नेताओं के नाम लेना उचित नहीं होगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि ये नेता चुनाव के काम में देर से लगे। अभिजित वंजारी हमेशा सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को साथ लेकर चलने वाले जननेता हैं, परंतु नागपुर शहर में वैसी एकजुटता या तालमेल दिखाई नहीं दिया।”

उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक लोगों ने एक-दूसरे की टांग खिंचाई में ही समय गंवा दिया।

ग्रामीण भाग पर भरोसा –
वडेट्टीवार ने कहा कि चंद्रपुर, गडचिरोली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मतदाता बड़ी संख्या में वंजारी के पीछे खड़े रहे हैं। वहां उन्हें प्रचंड प्रतिसाद मिला है।

“नागपुर से 50% मत मिले तो भी, नागपुर के अलावा शेष चार से पांच जिलों से अभिजित वंजारी को स्नातक मतदाताओं का उत्तम और अभूतपूर्व समर्थन मिला है। इसी ग्रामीण समर्थन के मजबूत भरोसे पर महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजित वंजारी 100% चुनावी मैदान में बाजी मारेंगे और विजयी होकर विधान परिषद में जाएंगे, ऐसा ठोस विश्वास है।”

पृष्ठभूमि –
गौरतलब है कि नागपुर विभाग स्नातक मतदारसंघ के लिए 23 अक्टूबर को 6 जिलों – नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गडचिरोली के 445 केंद्रों पर मतदान हुआ था, जिसमें 64.82% मतदान दर्ज हुआ। कुल 38 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतगणना कल 27 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से मानकापुर इनडोर स्टेडियम में 84 टेबल पर होगी।

वडेट्टीवार के इस बयान के बाद नागपुर स्नातक चुनाव का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है और पार्टी के भीतर चर्चा तेज हो गई है।

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Nagpur, IN
06:30 am, 27 Oct 2026
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