Connect with us

Hindi

गुटखा माफिया पर मकोका की मार, अब जमानत भी दूर की कौड़ी

Published

on

  • तुकाराम मुंढे का प्रहार

मुंबई, 13 जून 2026 : महाराष्ट्र में प्रतिबंधित गुटखा, तंबाखू एवं निकोटीनयुक्त पानमसाला के अवैध व्यापार पर अब राज्य सरकार ने अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई का निर्णय लिया है। अन्न व औषध प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे ने संगठित अपराध के अंतर्गत आने वाले गंभीर प्रकरणों में महाराष्ट्र संगठित गुन्हेगारी नियंत्रण अधिनियम (मकोका) 1999 लागू करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

केवल विक्रेता नहीं, पूरी शृंखला निशाने पर

FDA की जाँच में सामने आया है कि इस अवैध व्यापार के पीछे उत्पादक, वितरक, वाहतूकदार, गोदाम चालक, थोक विक्रेता और किरकोल विक्रेता का संगठित जाल कार्यरत है। बनावटी कागजात, बेनामी व्यवहार, गुप्त गोदाम और अंतरराज्यीय पुरवठा शृंखला के माध्यम से यह व्यापार चलाया जा रहा था। इसी कारण अब कार्रवाई का दायरा केवल दुकानदार तक सीमित न रखकर पूरी आपूर्ति शृंखला को ध्वस्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

कब लगेगा मकोका?

मकोका कानून की धाराओं के अनुसार यदि

  • अपराध के लिए 3 वर्ष या उससे अधिक का कारावास हो
  • पिछले 10 वर्षों में आरोपी के विरुद्ध एक से अधिक आरोपपत्र दाखिल हुए हों,
  • अपराध आर्थिक लाभ के लिए संगठित रूप से किया गया हो, तो ऐसे प्रकरणों में मकोका लागू करने की पात्रता की जाँच की जाएगी।

कार्रवाई का स्वरूप

  • संयुक्त अभियान: पुलिस और FDA के समन्वय से संयुक्त छापेमारी होगी।
  • जिलास्तर पर निगरानी : प्रत्येक जिले में मकोका पात्र प्रकरणों की स्वतंत्र पंजी रखी जाएगी।
  • राज्यस्तरीय समीक्षा : सभी प्रकरणों का नियमित परीक्षण राज्यस्तर पर होगा।
  • जमानत पर सख्ती: मकोका लगने के बाद जमानत के लिए कठोर शर्तें पूरी करनी होंगी। सरकारी अभियोक्ता, पुलिस और FDA मिलकर न्यायालय में प्रभावी पैरवी करेंगे।

नागरिकों से अपील

ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी गुटखा, तंबाखू या निकोटीनयुक्त पानमसाला का उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण या बिक्री होती दिखे तो तत्काल स्थानीय FDA कार्यालय या पुलिस को सूचित करें।

आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि सार्वजनिक आरोग्य के लिए खतरा बने इस अवैध व्यापार को जड़ से उखाड़ने के लिए अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Hindi

NGO सशक्तिकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न, 6 जिलों की 22 संस्थाओं ने लिया हिस्सा

Published

on

  • ग्रामायण प्रतिष्ठान और दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान का संयुक्त आयोजन, CSR फंड, 12A-80G, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और ब्रांडिंग पर विशेषज्ञों ने दिया मार्गदर्शन

यवतमाल, 25 अक्टूबर 2026 :

ग्रामायण प्रतिष्ठान, नागपुर और दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान (दीनदयाल प्रबोधिनी), यवतमाल के संयुक्त तत्वावधान में “NGO का सशक्तिकरण – Strengthening of NGO” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2026 को उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यशाला का आयोजन सुबह 10.00 से शाम 5.00 बजे तक दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान, मातोश्री वृद्धाश्रम के पास, निलोना तालाब के किनारे, गोधनी, यवतमाल में किया गया था।

40 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी –
इस कार्यशाला में यवतमाल जिले के अलावा वर्धा और वाशिम जिले से भी सेवाभावी संस्थाओं के पदाधिकारी विशेष निमंत्रण पर उपस्थित रहे। कुल 6 जिलों की 22 संस्थाओं के 40 से अधिक प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में सहभाग लिया।

इन विषयों पर हुआ गहन मार्गदर्शन –
कार्यशाला में NGO से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा सखोल मार्गदर्शन दिया गया :

  1. NGO पंजीकरण प्रक्रिया, 12A, 80G, CSR-1
  2. CSR फंड प्राप्त करने की प्रक्रिया और कंपनियों से संपर्क कैसे करें
  3. प्रभावी प्रोजेक्ट रिपोर्ट और वार्षिक रिपोर्ट कैसे तैयार करें
  4. हिसाब, ऑडिट और दस्तावेजों की पूर्तता

ग्रामायण प्रतिष्ठान की ओर से श्री विजय खटी ने इन विषयों पर मार्गदर्शन किया। श्री खटी को CSR संबंधी विषयों का कई वर्षों का अनुभव है। इसके बाद ब्रांडिंग और सोशल मीडिया विषय पर ग्रामायण के अध्यक्ष श्री अनिल सांबरे ने उपस्थितों को मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ –
कार्यक्रम के प्रारंभ में दीनदयाल जी और भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन किया गया। दीनदयाल संस्था के कार्य को दर्शाने वाली एक वीडियो फिल्म दिखाई गई। दीनदयाल प्रबोधिनी के CEO श्री गजानन परसोडकर ने सभी NGO पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का स्वागत किया। मंजुषा रागीट ने ग्रामायण प्रतिष्ठान की भूमिका स्पष्ट की।

इस अवसर पर दीनदयाल प्रतिष्ठान के सचिव श्री विजयराव कद्रे, श्री अनिल सांबरे, डॉ. चंद्रकांत रागीट, श्री संजय सराफ विशेष रूप से उपस्थित थे। उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने अपना और अपनी संस्था का परिचय दिया।

आयोजकों ने बताया कि कई संस्थाएं वर्षों से उत्कृष्ट सामाजिक कार्य कर रही हैं, लेकिन दस्तावेज, CSR फंड और सरकारी योजनाओं के अभाव में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन कठिनाइयों को दूर कर संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था।

उपस्थित संस्थाओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस उपक्रम को अत्यंत उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करने की मांग की।

Continue Reading

Business

वेकोलि में ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ के संदेश के साथ सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ

Published

on

  • सीएमडी डॉ. हेमंत शरद पांडे ने दिलाई शपथ, डिजिटल पारदर्शिता और नैतिक कार्यसंस्कृति पर जोर, मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में होंगे विविध कार्यक्रम

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ आज दिनांक 26.10.2026 को ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ की थीम के साथ किया गया।

वेकोलि के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. हेमंत शरद पांडे ने कंपनी मुख्यालय में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्कता जागरूकता की शपथ दिलाकर सप्ताह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक (वित्त एवं मानव संसाधन) श्री बिक्रम घोष, निदेशक (तकनीकी/परिचालन एवं योजना) डॉ. अंजनी कुमार तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय मधुकर म्हेत्रे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सीएमडी ने दिया पारदर्शिता और नैतिकता का संदेश –
अपने संबोधन में डॉ. हेमंत शरद पांडे ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को अपने कार्यों का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर सतर्कता के प्रति सदैव सजग रहना और प्रत्येक दायित्व का निर्वहन सकारात्मक दृष्टिकोण, पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ करना आवश्यक है। सभी को अपने आचरण एवं कार्यप्रणाली में उच्च नैतिक मानदंडों का पालन करते हुए सत्यनिष्ठा को कार्यसंस्कृति का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

डिजिटल प्रयासों से बढ़ी पारदर्शिता –
मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय मधुकर म्हेत्रे ने अपने संबोधन में वेकोलि द्वारा पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे डिजिटल प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा विकसित विभिन्न डिजिटल पोर्टल्स के माध्यम से कार्यों में मैन्युअल हस्तक्षेप कम हुआ है तथा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिला है। डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग सुशासन एवं भ्रष्टाचार-मुक्त कार्यप्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत वेकोलि मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्कता, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

Continue Reading

Education

हरियाली में बसा नन्हा मेहमान – वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट, छोटे तालाब-बगिया बने आशियाना

Published

on

  • शहर के छोटे गार्डन, घास के मैदान और जलकुंड दे रहे दुर्लभ डेमसेल्फ्लाई को जीवन, शिवाजी साइंस कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. शार्यु घोणमोडे की रिसर्च में खुलासा, मानसून बाद दिखता है सेब जैसा हरा-पीला कीट, शहरी जैव-विविधता के लिए शुभ संकेत

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

कंक्रीट के जंगल के बीच नागपुर की छोटी-छोटी हरियाली में एक नन्हा, सेब जैसा हरा-पीला कीट अपना घर बसा रहा है। नाम है – वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट (Ischnura rubilio)। यह छोटी सी डेमसेल्फ्लाई बता रही है कि जंगल बचाने के लिए बड़े जंगल जरूरी नहीं, छोटा सा तालाब, बगिया का जलकुंड और घास का टुकड़ा भी काफी है।

कांग्रेस नगर स्थित शिवाजी साइंस कॉलेज के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. शार्यु व्ही. घोणमोडे के अवलोकन के अनुसार, शहर के छोटे गार्डन, घास के पैच और जल निकाय इस दुर्लभ प्रजाति को आवास दे रहे हैं।

डॉ. घोणमोडे ने बताया, “शहर में वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट की मौजूदगी दिखाती है कि छोटे-छोटे हरे-भरे टुकड़े भी ताजे पानी से जुड़ी जैव-विविधता को शहरीकरण के बीच बचा सकते हैं। गार्डन के तालाब से लेकर घास के मैदान तक, यह कीट याद दिलाता है कि शहरी वन्यजीवों को जिंदा रहने के लिए हमेशा बड़े जंगलों की जरूरत नहीं होती।”

कैसा दिखता है यह कीट ?
डॉ. घोणमोडे ने बताया कि नर कीट का शरीर सेब जैसा हरा, छाती पर काली धारियां और पेट का हिस्सा नीली टिप के साथ पीला होता है। बहुत ध्यान से देखने पर ही दिखता है। मादा आमतौर पर थोड़ी फीकी होती है और उसके शरीर के ऊपर काली पट्टी ज्यादा चौड़ी होती है।

कहां मिलता है ?
तालाब, गार्डन के जलकुंड, नाली के किनारे की हरियाली, मौसमी दलदल और बारिश के पानी से भरे गड्ढे – ये सब इन कीटों के लिए उपयुक्त घर बन सकते हैं। डेमसेल्फ्लाई के लिए पानी सिर्फ लैंडस्केप का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन चक्र के लिए जरूरी है।

डॉ. घोणमोडे के अनुसार, “मानसून के बाद का समय इन कीटों को देखने के लिए सबसे अच्छा है। नम मिट्टी, अस्थायी जलकुंड और ताजी वनस्पति उन्हें अनुकूल परिस्थितियां देती है, जबकि ठंडी सुबहों में उन्हें घास की पत्तियों पर शांत बैठे देखा जा सकता है।”

पर्यावरण के लिए संकेतक :
इनकी मौजूदगी ताजे पानी के आवास की उपलब्धता के बारे में सुराग देती है। डॉ. घोणमोडे ने कहा, “डेमसेल्फ्लाई अपने लार्वा चरण में जलीय पर्यावरण पर निर्भर रहती हैं। इनकी मौजूदगी यह बताती है कि क्षेत्र में उपयुक्त जलीय और अर्ध-जलीय आवास मौजूद है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नन्हे कीट का नागपुर में दिखना शहर की शहरी जैव-विविधता के लिए एक शुभ और उत्साहजनक संकेत है।

Continue Reading
Advertisement

Nagpur, IN
07:49 pm, 26 Oct 2026
weather icon 29.8 °C
Clear Sky
Wind Gust 13.4 Km/h

Trending