नागपुर, 6 जून 2026 : नागपुर नगर जिला कांग्रेस समिति में आज नेतृत्व परिवर्तन के साथ एक नए कालखंड का सूत्रपात होने जा रहा है, किन्तु यह परिवर्तन अपने साथ ‘एकता की अग्निपरीक्षा’ भी लेकर आया है। सिविल लाइंस स्थित डॉ. वसंतराव देशपांडे सभागार में नवनियुक्त नगर अध्यक्ष श्री प्रफुल विनोदराव गुडधे का पदभार ग्रहण समारोह आज सायं 05.00 बजे आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन की अध्यक्षता पश्चिम नागपुर के विधायक एवं पूर्व नगर अध्यक्ष विकास ठाकरे कर सकते है। मंच पर एकता का दृश्य उपस्थित होने की अपेक्षा है, परन्तु सभागार के भीतर और राजनैतिक गलियारों में यह प्रश्न प्रबल है कि यह एकता वास्तविक होगी अथवा केवल औपचारिकता मात्र।
बारह वर्ष बाद बदला नेतृत्व, आरम्भ हुआ मतभेद*
नगर कांग्रेस में आंतरिक मतभेद सदैव चर्चा का विषय रहे हैं। बारह वर्ष तक विधायक विकास ठाकरे नगर अध्यक्ष पद का दायित्व निभाते रहे। उनके त्यागपत्र के पश्चात वरिष्ठ सदस्य प्रफुल गुडधे को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। गुडधे को सुनील केदार पक्ष का माना जाता है।
संगठन के सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति के समय ठाकरे अपने किसी निकट सहयोगी को इस पद पर चाहते थे। किन्तु सुनील केदार गुट के समझे जाने वाले गुडधे को नियुक्त कर दिया गया। तभी से ठाकरे समर्थक गुट ने देवड़िया स्थित कांग्रेस कार्यालय से दूरी बना ली है। गुडधे के नेतृत्व में आयोजित किसी भी जन आंदोलन या कार्यक्रम में ठाकरे गुट के नगर पार्षद व समर्थक सम्मिलित नहीं हुए हैं। विधान परिषद प्रत्याशी चयन हेतु आयोजित मंत्रणाओं से भी इस गुट ने दूरी बनाए रखी है।
दो कार्यशैलियों का विरोधाभास: जमीनी नेता बनाम सीमित दायरा
कार्यकर्ताओं के मध्य दोनों नेताओं की कार्यपद्धति में आकाश-पाताल का अंतर ही वर्तमान विवाद की जड़ माना जा रहा है:0
जनसंपर्क एवं सहज उपलब्धता:*
विकास ठाकरे को कार्यकर्ता ‘सदैव उपलब्ध जननेता’ के रूप में स्मरण करते हैं। उनसे भेंट करना सरल था और वे प्रत्येक आयोजन में आमंत्रण स्वीकार करते थे। नगर में आगमन पर प्रत्येक वरिष्ठ कांग्रेस नेता का स्वागत एवं सत्कार वे स्वयं करते थे। पक्ष-विपक्ष के प्रत्येक मंच पर वे आवश्यकता अनुसार उपस्थित रहते थे। सम्पूर्ण नगर का भ्रमण कर उन्होंने जनसंपर्क स्थापित किया था।
इसके विपरीत, प्रफुल गुडधे के विषय में धारणा है कि वे ‘अत्यंत सावधान एवं सीमित दायरे’ में कार्य करते हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनसे भेंट करना कठिन है और वे आमंत्रण भी चुनकर स्वीकार करते हैं। भारतीय जनता दल से कांग्रेस में सम्मिलित होने के पश्चात आज तक वे अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर नहीं निकले हैं।
राजनैतिक पृष्ठभूमि एवं सम्पर्क तंत्र:*
विकास ठाकरे आरम्भ से ही कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे। बारह वर्ष तक विधायक तथा नगर अध्यक्ष के रूप में उन्होंने नेतृत्व किया। उनका सम्पर्क तंत्र व्यापक रहा और वे लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ सार्वजनिक रूप से दिखाई देते थे।
प्रफुल गुडधे BJP से कांग्रेस में आए। कार्यकर्ताओं के अनुसार उनका राजनैतिक सम्बन्ध मुख्य रूप से सुनील केदार, अविनाश पांडे, सतीश चतुर्वेदी तथा कभी कभार नितिन राउत तक सीमित रहा है। नगर अध्यक्ष नियुक्त होने के पश्चात भी वे केवल वरिष्ठ नेताओं से भेंट कर रहे हैं। सामान्य कार्यकर्ता से उनका प्रत्यक्ष सम्पर्क स्थापित नहीं हो पाया है।
गुडधे का शक्ति प्रदर्शन: उपस्थिति की अपील, अनुपस्थिति की आशंका*
आज सायंकाल होने वाला पदभार ग्रहण समारोह गुडधे के लिए अपना संगठनात्मक बल प्रदर्शित करने का प्रथम अवसर होगा। समारोह में जिले के सभी दलीय नेता, विधायक, सांसद, पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहने वाले हैं। सभी पदाधिकारियों, सभी शाखाओं के अध्यक्ष, खंड अध्यक्ष, नगर पार्षद, पूर्व नगर पार्षद, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, सेवादल के निष्ठावान पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से उपस्थिति की अपील की गई है।
समारोह में प्रमुख उपस्थिति के रूप में मा. श्रीमती लिलाताई चितळे, मा. श्री. विजय वडेट्टीवार, मा. श्री. सतीशबाबू चतुर्वेदी, मा. श्री. अनिस अहमद, मा. श्री. विलासराव मुत्तेमवार, मा. श्री. डॉ. नितीन राऊत, मा. श्री. अविनाशजी पांडे, मा. श्री. कुणाल चौधरी, मा. श्री. सुनील केदार सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं के नाम अंकित हैं।
किन्तु संगठन में यह चर्चा भी प्रबल है कि ठाकरे गुट के बीस से बाईस नगर पार्षद इस आयोजन से दूरी बना सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो नाराजगी और आंतरिक मतभेद पुनः सार्वजनिक हो जाएँगे। यह समारोह नगर कांग्रेस की ‘एकजुटता’ की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। देखना यह होगा कि क्या ठाकरे समर्थक नगर पार्षद व अन्य पदाधिकारी-कार्यकर्ता इस समारोह में सम्मिलित होते हैं या नहीं।
भविष्य की चुनौती: क्या टूटेगी ‘दायरे’ की दीवार?*
आज के समारोह में विकास ठाकरे की अध्यक्षता औपचारिक एकता का संदेश अवश्य देगी। किन्तु संगठन में यह प्रश्न अब भी अनुत्तरित है कि क्या ठाकरे समर्थक गुट हृदय से गुडधे के नेतृत्व को स्वीकार करेगा।
कार्यकर्ताओं के मध्य सबसे बड़ी आशंका यह है कि यदि गुडधे अपने ‘सीमित दायरे’ से बाहर नहीं निकले और विकास ठाकरे जैसी ‘सर्वसुलभ कार्यशैली’ नहीं अपनाई तो आगामी समय कांग्रेस के लिए कठिन हो सकता है। एक जमीनी नेता के स्थान पर सीमित संपर्क वाले अध्यक्ष से सामान्य कार्यकर्ता स्वयं को दूर अनुभव कर सकता है।
प्रफुल विनोदराव गुडधे का पदभार ग्रहण समारोह आज सायं सम्पन्न होगा, किन्तु नागपुर नगर कांग्रेस के लिए ‘एकता की अग्निपरीक्षा’ आज से ही आरम्भ हो रही है। आने वाला समय बताएगा कि क्या नव नियुक्त अध्यक्ष सभी गुटों को साथ लेकर चल पाते हैं अथवा नहीं। फिलहाल सभागार में एकता के नारे लगने की अपेक्षा है, परन्तु सभागार के बाहर की वास्तविकता अभी भी विभाजन की ओर संकेत कर रही है।
परिसर अभ्यास के तहत कोदामेंढी में शामलाल धांडे के घर क्षेत्रभेंट, शेण से गैस बनने की प्रक्रिया, खाना पकाने में उपयोग और अवशेष से खाद बनने की जानकारी, प्रत्यक्ष अनुभव से बढ़ी वैज्ञानिक सोच
कोदामेंढी, 26 अक्टूबर 2026 :
आनंददायी शनिवार के तहत परिसर अभ्यास विषय के अंतर्गत जिला परिषद शाला तोंडली के विद्यार्थियों ने गांव में शामलाल धांडे के घर लगे गोबरगैस संयंत्र की क्षेत्रभेंट की।
परिसर अभ्यास में गोबरगैस संयंत्र के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई थी, जिसके बाद बच्चों के मन में कई सवाल उठे – गोबरगैस क्या है? यह कैसे बनता है? संयंत्र कैसे बना होता है? इसका उपयोग क्या है? इन्हीं जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए बच्चों को प्रत्यक्ष संयंत्र दिखाया गया।
इस दौरान बच्चों को संयंत्र की कार्यप्रणाली, गोबर से जैव-गैस (बायोगैस) बनने की प्रक्रिया, खाना पकाने में इसके उपयोग और संयंत्र से निकलने वाले अवशेषों का खाद के रूप में इस्तेमाल होने की विस्तृत जानकारी दी गई। शामलाल धांडे ने बच्चों के सभी सवालों के संतोषजनक जवाब दिए।
इस क्षेत्रभेंट के माध्यम से बच्चों को समझाया गया कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन में कैसे उपयोगी है। गोबरगैस जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करते हैं और जैविक पदार्थों का सही उपयोग, कचरा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का महत्व भी बताया गया।
इस अवसर पर मुख्याध्यापिका अनुराधा धुर्डे ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए प्रत्यक्ष निरीक्षण, प्रश्नोत्तर और साक्षात्कार के माध्यम से ज्ञान अर्जित करने का महत्व समझाया। इस उपक्रम से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, निरीक्षण कौशल, सवाल पूछने की प्रवृत्ति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। इस उपक्रम में सह-शिक्षक निलेश जाधव का सहयोग रहा।
किताबी ज्ञान को प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ने वाली यह क्षेत्रभेंट विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, आनंददायी और प्रेरणादायी साबित हुई।
गरंडा-बखारी में पाइप और वैकल्पिक रास्तों पर उठे सवाल – पारशिवनी-कन्हान पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई की मांग, संगठित रैकेट के सबूत मिले तो मकोका लगाने की आवाज, तहसीलदार ने माने नदी में गड्ढों के बगल से बनाए गए वैकल्पिक रास्ते
नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :
पेच-कन्हान नदी क्षेत्र में कथित अवैध रेत उत्खनन, भंडारण और परिवहन की शिकायतों के बीच जांच का दायरा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। पारशिवनी के तहसीलदार सुरेश वाघचौरे ने खुद माना है कि नदी पात्र में गड्ढे खोदकर रास्ते रोके जाने के बावजूद उनके बगल से वैकल्पिक रास्ते बनाए जा रहे हैं। ऐसे में अब सवाल सिर्फ रेत निकालने वालों पर नहीं, बल्कि पूरी चेन की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है।
माउली, नायकुंड, पालोरा, कालाफाटा, पिपला, वागोला, मेहदी, इटगांव, गरंडा, डोरली और बखारी क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों को लेकर मांग है कि प्रशासन उत्खनन स्थलों, परिवहन मार्गों, रेत के भंडारों और संबंधित दस्तावेजों की संयुक्त पड़ताल करे।
CDR और मोबाइल लोकेशन की कानूनी जांच की मांग –
मामले में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने के बाद अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल टावर लोकेशन की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की मांग की जा रही है।
हालांकि यह स्पष्ट है कि केवल फोन संपर्क या लोकेशन के आधार पर किसी की संलिप्तता साबित नहीं होती। ऐसी जांच सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और लागू कानूनों के अनुसार ही हो सकती है। जांच में देखा जाना चाहिए कि संबंधित अवधि में शिकायतें कब मिलीं, उन पर क्या कार्रवाई हुई, मौके का निरीक्षण हुआ या नहीं और सरकारी रिकॉर्ड में क्या दर्ज है।
कुछ कर्मचारियों द्वारा एक से अधिक मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने का संदेह भी व्यक्त किया जा रहा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। एक से अधिक नंबर होना अपने आप में अपराध का सबूत नहीं है।
राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो –
स्थानीय स्तर पर इस कथित कारोबार में राजनीतिक संपर्कों या हस्तक्षेप की आशंका भी जताई जा रही है। लेकिन बिना ठोस प्रमाण के किसी व्यक्ति या पदाधिकारी पर आरोप को तथ्य नहीं माना जा सकता। मांग है कि प्रशासन बिना दबाव के शिकायतों, परमिट, परिवहन रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच करे।
गरंडा-बखारी में पाइप और रास्तों का रहस्य –
पेच नदी किनारे नया रास्ता तैयार करने और बखारी शिवार की ओर नदी पात्र में बड़े पाइप डालने की चर्चा को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। क्या इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई है? क्या नदी पात्र में बदलाव किया गया है? क्या इसका कथित अवैध रेत परिवहन से संबंध है? इन सवालों का जवाब संयुक्त स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच से ही मिल सकता है।
पारशिवनी-कन्हान पुलिस के समन्वय की जरूरत –
यह क्षेत्र पारशिवनी और कन्हान पुलिस थानों की सीमा में आता है, इसलिए दोनों थानों, राजस्व विभाग, रामटेक के उपविभागीय अधिकारी, जिलाधिकारी और नागपुर ग्रामीण पुलिस के बीच समन्वय जरूरी बताया जा रहा है। नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मस्के और स्थानीय अपराध शाखा से संयुक्त जांच की मांग उठ रही है।
इस मामले में पारशिवनी के सहायक पुलिस निरीक्षक किशोर शेळके से फोन पर संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिली। अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
राजस्व मंत्री से DGP तक हस्तक्षेप की मांग –
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री, गृहमंत्री, पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस महानिरीक्षक से मामले का संज्ञान लेने की मांग हो रही है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के समन्वय से विशेष जांच अभियान चलाकर अधिकृत रेत स्रोत, परिवहन अनुमति और बाजार में आपूर्ति की स्थिति की भी पड़ताल करने की जरूरत बताई गई है।
संगठित अपराध मिला तो मकोका पर विचार –
मामले में कठोर कार्रवाई और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाने की मांग भी उठी है। हालांकि मकोका के लिए सिर्फ बड़े पैमाने पर रेत चोरी की शिकायत पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कानून में निर्धारित संगठित अपराध के आवश्यक तत्वों का पूरा होना जरूरी है। यदि निष्पक्ष जांच में ऐसे ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो सक्षम अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं, अन्यथा खनन, राजस्व, पर्यावरण और आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई होगी।
फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन संयुक्त निरीक्षण कब करता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में 38 उम्मीदवार, 64.82% मतदान के बाद कल मतगणना, वडेट्टीवार ने कहा – शहर के नेताओं ने ‘तुझा की माझा’ खेला, चंद्रपुर-गडचिरोली में वंजारी को अभूतपूर्व समर्थन
नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :
महाराष्ट्र विधान परिषद के नागपुर विभाग पदवीधर (स्नातक) मतदारसंघ चुनाव की मतगणना से एक दिन पहले कांग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने नागपुर शहर के कई स्थानीय नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के दौरान घोला घातला (धोखा दिया) और ‘तुझा की माझा’ का खेल खेलकर समय बर्बाद किया।
वडेट्टीवार ने हालांकि दावा किया है कि इसके बावजूद महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजित वंजारी की जीत 100% निश्चित है, क्योंकि नागपुर ग्रामीण और शेष विदर्भ में उन्हें स्नातक मतदाताओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला है।
वडेट्टीवार ने क्या कहा ? चुनाव पर बात करते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य के राजस्व मंत्री ने इस स्नातक चुनाव को अत्यंत प्रतिष्ठा का विषय बना दिया था। सत्ता पक्ष के नेताओं ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक दी थी, तब कांग्रेस के स्थानीय स्तर के कुछ नेताओं की भूमिका संदेहास्पद और सुस्त रही।
उन्होंने कहा, “कुछ नेताओं के नाम लेना उचित नहीं होगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि ये नेता चुनाव के काम में देर से लगे। अभिजित वंजारी हमेशा सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को साथ लेकर चलने वाले जननेता हैं, परंतु नागपुर शहर में वैसी एकजुटता या तालमेल दिखाई नहीं दिया।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक लोगों ने एक-दूसरे की टांग खिंचाई में ही समय गंवा दिया।
ग्रामीण भाग पर भरोसा – वडेट्टीवार ने कहा कि चंद्रपुर, गडचिरोली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मतदाता बड़ी संख्या में वंजारी के पीछे खड़े रहे हैं। वहां उन्हें प्रचंड प्रतिसाद मिला है।
“नागपुर से 50% मत मिले तो भी, नागपुर के अलावा शेष चार से पांच जिलों से अभिजित वंजारी को स्नातक मतदाताओं का उत्तम और अभूतपूर्व समर्थन मिला है। इसी ग्रामीण समर्थन के मजबूत भरोसे पर महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजित वंजारी 100% चुनावी मैदान में बाजी मारेंगे और विजयी होकर विधान परिषद में जाएंगे, ऐसा ठोस विश्वास है।”
पृष्ठभूमि – गौरतलब है कि नागपुर विभाग स्नातक मतदारसंघ के लिए 23 अक्टूबर को 6 जिलों – नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गडचिरोली के 445 केंद्रों पर मतदान हुआ था, जिसमें 64.82% मतदान दर्ज हुआ। कुल 38 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतगणना कल 27 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से मानकापुर इनडोर स्टेडियम में 84 टेबल पर होगी।
वडेट्टीवार के इस बयान के बाद नागपुर स्नातक चुनाव का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है और पार्टी के भीतर चर्चा तेज हो गई है।