- सरकार पर तीखा हमला – ‘रोजगार दो, भीख नहीं’, मुफ्तखोरी की राजनीति छोड़ युवाओं के हाथ में काम दो, तारसा रोड चौक पर राशन की कालाबाजारी और फर्जी बिलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग
जो सरकार नागरिकों के श्रम, स्वाभिमान और बुद्धि का सम्मान नहीं करती, वह राष्ट्र को प्रगति की राह पर नहीं, बल्कि निर्भरता के अंधकार की ओर धकेलती है।” इसी तीखे बयान के साथ सीनियर काउंसिल एडवोकेट गुल्हाने ने केंद्र में लगातार तीसरी बार और राज्य में दूसरी बार सत्ता में आई सरकार की लोकलुभावन नीतियों पर जोरदार हमला बोला है।
एडवोकेट गुल्हाने ने अपने प्रेस नोट में कहा कि गरीब और जरूरतमंद को सहायता देना अलग बात है, लेकिन सहायता को ही स्थायी व्यवस्था बना देना राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। सरकार की प्राथमिकता ऐसी होनी चाहिए कि नागरिक अपने श्रम से सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
‘5 किलो अनाज नहीं, हाथों में काम चाहिए’
गुल्हाने ने कहा कि केवल मुफ्त राशन देने से गरीबी का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। देश के युवाओं को रोजगार, कौशल, उद्योग और व्यवसाय के अवसर देना ही असली सशक्तिकरण है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया – “युवाओं को हर महीने मुफ्त अनाज देने के बजाय उन्हें ऐसा रोजगार क्यों नहीं दिया जाता, जिससे वे अपने परिवार का पेट स्वयं भर सकें?”
उनका आरोप है कि लगातार मुफ्त योजनाओं पर निर्भरता बढ़ने से श्रम की प्रतिष्ठा और आत्मनिर्भरता की भावना प्रभावित हो रही है। हालांकि वे खाद्य सुरक्षा जैसी योजनाओं की जरूरत से इनकार नहीं करते, लेकिन मांग करते हैं कि इसके साथ रोजगार और कौशल विकास की मजबूत व्यवस्था अनिवार्य हो।
खेत, दुकान और छोटे उद्योगों में मजदूरों की कमी
एडवोकेट गुल्हाने ने दावा किया कि ग्रामीण और छोटे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर श्रमिक नहीं मिल रहे हैं, जिससे कई उद्योगों को दूसरे राज्यों से श्रमिक बुलाने पड़ रहे हैं।
“जिस देश में युवा काम मांग रहा हो और उद्योगों को कामगार तलाशने के लिए दूसरे प्रदेशों की ओर देखना पड़े, वहां रोजगार नीति पर गंभीर आत्ममंथन जरूरी है,” उन्होंने कहा। यदि स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार और बेहतर मजदूरी मिले तो उन्हें पलायन या सरकारी सहायता पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल
गुल्हाने ने सरकारी राशन व्यवस्था में कथित अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर लाभार्थियों को मिलने वाला अनाज गुणवत्ता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता और राशन की खरीद-बिक्री तथा कालाबाजारी का खेल चल रहा है।
उन्होंने मांग की कि राशन दुकानों पर अचानक और नियमित जांच हो, स्टॉक का डिजिटल मिलान हो, वितरण रजिस्टर और अनाज की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
तारसा रोड चौक का मामला जांच के घेरे में
विशेष रूप से तारसा रोड चौक क्षेत्र में कथित तौर पर सरकारी राशन की खरीद-बिक्री और फर्जी बिलों के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की मांग उन्होंने की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी अनाज खुले बाजार में बिक रहा है तो प्रशासन को पता लगाना चाहिए कि वह अनाज दुकानों या व्यापारियों तक पहुंचा कैसे।
उन्होंने मांग की कि संबंधित दुकानों के स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री के दस्तावेज, बिल, लाइसेंस और गोदामों में उपलब्ध माल की गहन जांच हो।
‘फर्जी बिल मिले तो लाइसेंस रद्द करो’
गुल्हाने ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि जांच में किसी राशन दुकान या व्यापारी द्वारा फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल प्रमाणित होता है तो केवल जुर्माना लगाकर मामला खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि कानून के अनुसार लाइसेंस निरस्तीकरण और आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार के सामने 7 मांगें
- मुफ्त राशन के साथ बड़े पैमाने पर स्थायी रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।
- युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार की ठोस व्यवस्था हो।
- सरकारी राशन दुकानों पर नियमित और औचक जांच हो।
- राशन की कथित कालाबाजारी नेटवर्क की जड़ तक जांच हो।
- तारसा रोड चौक सहित संदिग्ध राशन दुकानों के स्टॉक और बिलों का ऑडिट हो।
- फर्जीवाड़ा प्रमाणित होने पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
‘जनता को वोट के बदले मुफ्तखोरी नहीं, आत्मनिर्भरता चाहिए‘
गुल्हाने ने अंत में कहा कि जनता ने सरकार को लगातार सत्ता देकर विकास की बड़ी जिम्मेदारी दी है। इसलिए अब केवल घोषणाओं और लोकलुभावन योजनाओं के भरोसे नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग, शिक्षा, कौशल और आत्मनिर्भरता के ठोस मॉडल पर काम करना होगा।
गरीब को सहारा देना संवेदनशील शासन की जिम्मेदारी है, लेकिन गरीब को हमेशा गरीब बनाए रखना किसी भी सरकार की उपलब्धि नहीं हो सकती।
“देश को मुफ्त की आदत नहीं, मेहनत का सम्मान चाहिए। जनता को खैरात नहीं – अवसर चाहिए। युवाओं को राशन नहीं – रोजगार चाहिए!” – सीनियर काउंसिल एडवोकेट गुल्हाने